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Kangra News: पैरापिट होते तो बच सकती थी जान, ट्रैक्टर हादसा खड़े कर गया कई सवाल
Fri, 01 Mar 2024 01:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 01 Mar 2024 01:26 AM IST
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गुलेर (कांगड़ा)। हरिपुर-बनखंडी सड़क मार्ग पर हुआ हादसा परिवार के लिए एक ऐसा जख्म छोड़ गया है, जिसे वह कभी भी उभर नहीं पाएंगे। इस हादसे ने अपने साथ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जिस जगह पर यह सड़क हादसा हुआ है और जहां से ट्रैक्टर 30 फीट नीचे गिर गया है वहां पर किसी भी प्रकार का पैरापिट न होना भी अब लोगों की चर्चा में शामिल हो गया है। स्पॉट पर जगह इतनी तंग है कि वहां से एक वाहन ही सड़क पास कर सकता है। एक तरफ सड़क पर मलबा बिखरा हुआ है तो वहीं, दूसरी और पैरापिट नहीं लगे थे। अगर उस स्थान पर पैरापिट लगाए होते तो शायद ट्रैक्टर संतुलन खोने के बाद भी रुक सकता था या फिर इतना नीचे नहीं जा सकता था। वहीं, आठ किलोमीटर भरे इस सफर में कई जगह ऐसी देखी जा सकती हैं जहां पर पैरापिट लगाए जाना जरूरी हैं।
- बनखंडी-हरिपुर सड़क मार्ग पर निरीक्षण करके जहां-जहां क्रैश बैरियर या पैरापिट लगाने की संभावना देखी जाएगी, विभाग की ओर से उन स्थानों पर पैरापिट लगा दिए जाएंगे।
गुरबचन सिंह, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल हरिपुर
परीक्षा से पहले बेटे और बेटी पर टूटा दुखों का पहाड़
राज कुमार की मौत के बाद बेटी और बेटे के सिर से पिता का साया उठ चुका है। रोजाना की तरह राम कुमार अपने पेट की खातिर दिहाड़ी लगाने के लिए रोजमर्रा के जैसे घर से निकल चुका था। उसे क्या पता था कि आज का दिन उसके लिए काल बनकर सामने आया है। घर वालों को जब उसकी मौत की खबर पता चली तो वे सुन्न रह गए हैं। रामकुमार अपने घर का एकमात्र सहारा था जिसकी वजह से घर की रोजी-रोटी चलती थी। अब राज कुमार की मौत के बाद पीछे माता और पिता, पत्नी और दो बच्चे छूट गए हैं। शुक्रवार को 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे की अंग्रेजी परीक्षा है और शनिवार को 10वीं कक्षा में पढ़ रही बेटी की गणित की परीक्षा है। अब पिता की मौत की खबर के बाद बोर्ड परीक्षाओं के पहले बच्चों को परिवार को संभालने की परीक्षा देनी होगा।
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- बनखंडी-हरिपुर सड़क मार्ग पर निरीक्षण करके जहां-जहां क्रैश बैरियर या पैरापिट लगाने की संभावना देखी जाएगी, विभाग की ओर से उन स्थानों पर पैरापिट लगा दिए जाएंगे।
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गुरबचन सिंह, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल हरिपुर
परीक्षा से पहले बेटे और बेटी पर टूटा दुखों का पहाड़
राज कुमार की मौत के बाद बेटी और बेटे के सिर से पिता का साया उठ चुका है। रोजाना की तरह राम कुमार अपने पेट की खातिर दिहाड़ी लगाने के लिए रोजमर्रा के जैसे घर से निकल चुका था। उसे क्या पता था कि आज का दिन उसके लिए काल बनकर सामने आया है। घर वालों को जब उसकी मौत की खबर पता चली तो वे सुन्न रह गए हैं। रामकुमार अपने घर का एकमात्र सहारा था जिसकी वजह से घर की रोजी-रोटी चलती थी। अब राज कुमार की मौत के बाद पीछे माता और पिता, पत्नी और दो बच्चे छूट गए हैं। शुक्रवार को 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे की अंग्रेजी परीक्षा है और शनिवार को 10वीं कक्षा में पढ़ रही बेटी की गणित की परीक्षा है। अब पिता की मौत की खबर के बाद बोर्ड परीक्षाओं के पहले बच्चों को परिवार को संभालने की परीक्षा देनी होगा।
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