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Kangra News: टांडा में छह माह से धूल फांक रही डायलिसिस की चार मशीनें

Wed, 05 Nov 2025 01:50 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Nov 2025 01:50 AM IST
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Four dialysis machines have been gathering dust in Tanda for the last six months.
कांगड़ा। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान टांडा मेडिकल कॉलेज में लगभग छह माह से डायलिसिस की चार नई मशीनें धूल फांक रही हैं। इससे यहां पर डायलिसिस करवाने के लिए आने वाले मरीजों काे परेशानी हो रही है। इसकाे टांडा प्रशासन की लापरवाही कहें या कुछ और। टांडा मेडिकल कॉलेज में माैजूदा समय में 13 डायलिसिस की मशीनें हैं, जो मरीजों की संख्या के हिसाब से बहुत कम हैं। अगर डायलिसिस की सात मशीनें और आ जाती हैं ताे इससे मरीजाें काे डायलिसिस के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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संस्थान में एक डायलिसिस करने में लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता है। एक दिन में लगभग 25-26 मरीजाें के ही डायलिसिस हाे पाते हैं। दूरदराज के क्षेत्राें से आने वाले लाेगाें काे दिक्कत होती है। संंस्थान में लगभग छह माह से धूल फांक रही मशीनाें काे प्रशासन स्थापित कर दे ताे आने वाले समय में लाेगाें काे और राहत मिलेगी। मेरा एक सप्ताह में दाे बार डायलिसिस हाेता है।
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-अजय कुमार, जवाली


एक सप्ताह में हमें दाे बार डायलिसिस करवाने के लिए टांडा आना पड़ता है, लेकिन यहां पर मशीनाें की कमी हाेने के चलते मरीज काे परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर अस्पताल में मशीनें अधिक हाें ताे मरीज का जल्दी नंबर आ जाएगा। माैजूदा समय में यहां पर एक दिन में लगभग 25-26 मरीजाें के ही डायलिसिस हाे पाते हैं, जिससे लाेगाें दिक्कताें का सामना करना पड़ता है।
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-ऊषा देवी, शाहपुर



डायलिसिस करवाने के लिए हमें नगराेटा सूरियां से एक सप्ताह में दाे बार आना पड़ता है। अगर हमारा पहले नंबर पड़ जाए, ताे समय से घर पहुंच सकते हैं। घर पहुंचते-पहुंचते हमें अंधेरा हाे जाता है। हमारे क्षेत्र काे जाने के लिए बसाें का भी अभाव रहता है। अगर अस्पताल में अधिक मशीनें हाेंगी ताे लाेगाें काे अधिक सुविधा हाेगी।


सिमराे देवी, नगराेटा सूरियां



जाे नई सात मशीनें आनी थीं, उनमें से अब तक चार मशीनें संस्था में पहुंच चुकी हैं और तीन मशीनें अभी तक आनी हैं। चार मशीनाें काे लगभग माह के भीतर संस्थान में स्थापित कर दिया जाएगा, जिससे यहां पर आने वाले लाेगाें काे परेशानी का सामना न करना पड़े। 13 मशीनें पुरानी और अगर जाे तीन और मशीनें आनी हैं, वे आ जाती हैं ताे संस्थान के लिए 20 मशीनें उपयुक्त हाेंगी। इससे मरीजाें काे लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

-डॉ. पीयूष, डायलिसिस यूनिट इंचार्ज, टांडा
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