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Kangra News: पौंग झील में बढ़ेगा मछली उत्पादन, 17 लाख मत्स्य बीज छोड़ने का लक्ष्य

Tue, 27 Oct 2026 03:01 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 27 Oct 2026 03:01 AM IST
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Fish production to increase in Pong Lake; target set to release 1.7 million fish seeds
फतेहपुर (कांगड़ा)। महाराणा प्रताप सागर (पौंग जलाशय) में मछली उत्पादन बढ़ाने और मछुआरा परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मत्स्य विभाग ने बड़े स्तर पर मत्स्य बीज संचयन अभियान शुरू किया है।
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अभियान के तहत जलाशय में विभिन्न व्यावसायिक प्रजातियों के कुल 17 लाख उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज छोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 12,95,934 मत्स्य बीज जलाशय में छोड़े जा चुके हैं।
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महाराणा प्रताप सागर से जुड़े करीब 3600 मछुआरा परिवारों की आजीविका मत्स्य संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में जलाशय में बड़े पैमाने पर मत्स्य बीज छोड़ने की पहल को मछली उत्पादन बढ़ाने और मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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मत्स्य विभाग के सह निदेशक पवन शर्मा की अध्यक्षता में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य जलाशय में मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा देना, उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना और मछुआरा समुदाय की आजीविका को सुदृढ़ बनाना है। इसके तहत कतला के पांच लाख, रोहू के 7.25 लाख, ग्रास कार्प के 3.75 लाख और मोरी प्रजाति के एक लाख मत्स्य बीज जलाशय में छोड़े जाने प्रस्तावित हैं।
मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि सिहाल में संचालित अभियान के तहत अब तक कतला के 3,33,450, रोहू के 7,25,000, मोरी के 1,00,000 और ग्रास कार्प के 1,37,484 मत्स्य बीज जलाशय में छोड़े जा चुके हैं। इस तरह कुल 12,95,934 मत्स्य बीजों का संचयन पूरा हो चुका है।

गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर विशेष ध्यान
मत्स्य बीज संचयन अभियान के दौरान बीजों की गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इस कार्य की निगरानी विशेष पर्यवेक्षक डॉ. राकेश कुमार और डॉ. राजिंद्र कुमार कर रहे हैं, ताकि जलाशय में मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप संचयन सुनिश्चित किया जा सके।
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