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गेहूं खरीद में देरी पर अब एफसीआई और कृषि उपज मंडी समिति आमने-सामने
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ठाकुरद्वारा (कांगड़ा)। ठाकुरद्वारा गेहूं खरीद केंद्र में सरकारी दावों के बाद भी खरीद शुरू नहीं हो सकी है। अब अपनी साख बचाने के लिए कृषि उपज मंडी समिति और फूड कारपोरेशन गेहूं खरीद में देरी के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं, अब इंदौरा के मंड क्षेत्र में गेहूं की कटाई का काम जोरों से शुरू हो चुका है। कानूनन इस लाइसेंस के बन जाने से कृषि उपज मंडी समिति को प्रति क्विंटल 20 रुपये प्राइवेट खरीदारों से आमदनी होगी।
फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइन लगा देने से भी ठाकुरद्वारा गेहूं खरीद केंद्र में गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है। प्रशासन ने सरकारी जगह न होने के कारण ठाकुरद्वारा में स्थित एक प्राइवेट मिल मालिक की जगह में मंडी खोलने का आग्रह किया हुआ है। इसमें फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया वाले कृषि उपज मंडी समिति को चारदीवारी करने को बोल रहे हैं, जो कि संभव नहीं है। विभागों की इस खींचातानी में मंडी का कार्य ज्यों का त्यों लटका है। मंड क्षेत्र में गेहूं की कटाई पिछले 15 दिनों से शुरू हो चुकी है। किसान अपनी बेबसी को लेकर हिमाचल सरकार से मंडी खुलवाने की आस लगाए बैठा है। वहीं, कृषि उपज मंडी समिति के सचिव राज कुमार भारद्वाज का कहना है कि हमारी तरफ से खरीद की पूरी तैयारी कर ली गई है, लेकिन फूड कारपोरेशन की नई गाइडलाइन से देरी हो रही है। वहीं, फूड कारपोरेशन ठाकुरद्वारा मंडी के अधिकारी राकेश वर्मा का कहना है कि कृषि उपज मंडी समिति की ओर से गाइड लाइन को पूरा नहीं किया गया है। इसके कारण देरी हो रही है।
कृषि उपज मंडी समिति को आठ दिन बाद आई लाइसेंस बनाने की याद
इंदौरा के मंड क्षेत्र के ठाकुरद्वारा गांव में सरकार की ओर से की गई फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से गेहूं खरीद केंद्र खोलने की घोषणा अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जबकि गेहूं की खरीद कर रहे प्राइवेट खरीदारों को अब मौके पर रेवड़ियों की तरह लाइसेंस बांटे जा रहे हैं। किसानों की फसल के समय कृषि उपज मंडी समिति को लाइसेंस बनाने की याद आई है। किसानों ने इस लेटलतीफी पर पूछना शुरू कर दिया है कि क्या इस कार्य को समय रहते पूरा नहीं किया जा सकता था।
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फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइन लगा देने से भी ठाकुरद्वारा गेहूं खरीद केंद्र में गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है। प्रशासन ने सरकारी जगह न होने के कारण ठाकुरद्वारा में स्थित एक प्राइवेट मिल मालिक की जगह में मंडी खोलने का आग्रह किया हुआ है। इसमें फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया वाले कृषि उपज मंडी समिति को चारदीवारी करने को बोल रहे हैं, जो कि संभव नहीं है। विभागों की इस खींचातानी में मंडी का कार्य ज्यों का त्यों लटका है। मंड क्षेत्र में गेहूं की कटाई पिछले 15 दिनों से शुरू हो चुकी है। किसान अपनी बेबसी को लेकर हिमाचल सरकार से मंडी खुलवाने की आस लगाए बैठा है। वहीं, कृषि उपज मंडी समिति के सचिव राज कुमार भारद्वाज का कहना है कि हमारी तरफ से खरीद की पूरी तैयारी कर ली गई है, लेकिन फूड कारपोरेशन की नई गाइडलाइन से देरी हो रही है। वहीं, फूड कारपोरेशन ठाकुरद्वारा मंडी के अधिकारी राकेश वर्मा का कहना है कि कृषि उपज मंडी समिति की ओर से गाइड लाइन को पूरा नहीं किया गया है। इसके कारण देरी हो रही है।
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कृषि उपज मंडी समिति को आठ दिन बाद आई लाइसेंस बनाने की याद
इंदौरा के मंड क्षेत्र के ठाकुरद्वारा गांव में सरकार की ओर से की गई फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से गेहूं खरीद केंद्र खोलने की घोषणा अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जबकि गेहूं की खरीद कर रहे प्राइवेट खरीदारों को अब मौके पर रेवड़ियों की तरह लाइसेंस बांटे जा रहे हैं। किसानों की फसल के समय कृषि उपज मंडी समिति को लाइसेंस बनाने की याद आई है। किसानों ने इस लेटलतीफी पर पूछना शुरू कर दिया है कि क्या इस कार्य को समय रहते पूरा नहीं किया जा सकता था।
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