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आपदा से निपटने में काम आएगा बुजुर्गों का अनुभव : एडीएम
Thu, 22 Aug 2024 05:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 22 Aug 2024 05:03 AM IST
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धर्मशाला। समाज के लिए अपना सहयोग देने की इच्छा रखने वाले बुजुर्ग नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अब वरिष्ठ मंडल बनाए जाएंगे। महिला मंडल और युवा मंडलों की तर्ज पर ग्रामीण स्तर पर बुजुर्ग नागरिकों के लिए वरिष्ठ मंडल का गठन किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिक दिवस के उपलक्ष्य पर बुधवार को क्षेत्र के बुजुर्ग नागरिक और गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में एडीएम कांगड़ा डॉ. हरीश गज्जू ने यह बात कही।
डीसी ऑफिस धर्मशाला में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीएम ने कहा कि कई ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी और बुजुर्ग हैं जो समाज के लिए अभी भी अपना योगदान देना चाहते हैं। बुजुर्गों के अनुभव और उपलब्धता का लाभ लेते हुए अनेक प्रकार के सामाजिक कार्यों में उनका सहयोग और मार्गदर्शन लिया जा सकता है। सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की भागीदारी से जहां एक तरफ वे सक्रिय रहेंगे, वहीं उनके अनुभवों से हमें आपदाओं से निपटने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान खतरे के न्यूनीकरण और तैयारियों के लिए स्वयंसेवियों की बहुत कमी देखने को मिलती है। कई युवा शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में अपने क्षेत्रों से बाहर जाते हैं। इस संदर्भ में, सेवानिवृत्त बुजुर्ग आशा की किरण के रूप में उभर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पास अनुभव का खजाना है, क्षेत्र से गहरा जुड़ाव है, और सामाज की बेहतरी के लिए प्रतिबद्धता है, जो आपदा प्रबंधन और तैयारियों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
वरिष्ठ मंडल के गठन से सेवानिवृत्त लोगों के कौशल, ज्ञान और समर्पण का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के व्यापक जीवन अनुभव और स्थानीय भूगोल की समझ को आपदा प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाते हुए वरिष्ठ मंडलों द्वारा लोगों को आपदा प्रबंधन को लेकर जागरूक भी किया जा सकता है। इसके लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण और तैयारियों को लेकर वरिष्ठ मंडल सार्वजनिक सेमिनार, सामुदायिक अभ्यास, सूचना अभियान तथा स्थानीय स्कूलों और संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम कर सकते हैं। इस दौरान सेवानिवृत प्रो. अंजन कालिया, डॉ. रजिका, अनीता शर्मा और हरजीत भुल्लर सहित अन्य हितधारकों ने भी वरिष्ठ मंडल और सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की सहभागिता पर अपने विचार रखे।
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डीसी ऑफिस धर्मशाला में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीएम ने कहा कि कई ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी और बुजुर्ग हैं जो समाज के लिए अभी भी अपना योगदान देना चाहते हैं। बुजुर्गों के अनुभव और उपलब्धता का लाभ लेते हुए अनेक प्रकार के सामाजिक कार्यों में उनका सहयोग और मार्गदर्शन लिया जा सकता है। सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की भागीदारी से जहां एक तरफ वे सक्रिय रहेंगे, वहीं उनके अनुभवों से हमें आपदाओं से निपटने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान खतरे के न्यूनीकरण और तैयारियों के लिए स्वयंसेवियों की बहुत कमी देखने को मिलती है। कई युवा शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में अपने क्षेत्रों से बाहर जाते हैं। इस संदर्भ में, सेवानिवृत्त बुजुर्ग आशा की किरण के रूप में उभर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पास अनुभव का खजाना है, क्षेत्र से गहरा जुड़ाव है, और सामाज की बेहतरी के लिए प्रतिबद्धता है, जो आपदा प्रबंधन और तैयारियों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
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वरिष्ठ मंडल के गठन से सेवानिवृत्त लोगों के कौशल, ज्ञान और समर्पण का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के व्यापक जीवन अनुभव और स्थानीय भूगोल की समझ को आपदा प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाते हुए वरिष्ठ मंडलों द्वारा लोगों को आपदा प्रबंधन को लेकर जागरूक भी किया जा सकता है। इसके लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण और तैयारियों को लेकर वरिष्ठ मंडल सार्वजनिक सेमिनार, सामुदायिक अभ्यास, सूचना अभियान तथा स्थानीय स्कूलों और संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम कर सकते हैं। इस दौरान सेवानिवृत प्रो. अंजन कालिया, डॉ. रजिका, अनीता शर्मा और हरजीत भुल्लर सहित अन्य हितधारकों ने भी वरिष्ठ मंडल और सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की सहभागिता पर अपने विचार रखे।
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