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Kangra News: साडा गरली-परागपुर, 24 साल बाद भी विकास योजना नदारद
Tue, 17 Feb 2026 08:12 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 17 Feb 2026 08:12 AM IST
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परागपुर (कांगड़ा)। देश के पहले विरासत गांव परागपुर और ऐतिहासिक क्षेत्र गरली के विकास के लिए गठित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) खुद बदहाली का शिकार है। गठन के 24 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक क्षेत्र के लिए कोई ठोस विकास योजना तैयार नहीं कर पाया है। लापरवाही का आलम यह है कि पिछले दो वर्षों से ब्लॉक कार्यालय में विभाग का कोई भी कर्मचारी नहीं बैठा है।
विभागीय समन्वय की कमी का खामियाजा भी जनता ही भुगत रही है। एक ओर विद्युत बोर्ड के अधिशासी अभियंता मीटर लगाने के लिए एनओसी की अनिवार्यता खत्म होने की बात कह रहे हैं तो दूसरी ओर टीसीपी अधिकारी इसे आज भी जरूरी बता रहे हैं। अधिकारियों के इस विरोधाभास और आपसी तालमेल के अभाव ने आम जनता को असमंजस में डाल दिया है।
हालांकि विभाग पंचायतों के माध्यम से एनओसी देने की बात कहता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आज तक इस विषय पर कोई प्रशिक्षण शिविर आयोजित नहीं किया गया। स्थानीय निवासी पवन, रणजीत, रितेश, प्रवीण, नवीन और सुरजीत का कहना है कि सरकार की इस अनदेखी के कारण सुनियोजित विकास केवल फाइलों तक सीमित रह गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि परागपुर में तुरंत नियमित कर्मचारी की तैनाती की जाए, ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर हो सके।
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साडा गरली-परागपुर की किसी भी गतिविधि की मुझे कोई जानकारी नहीं है। कर्मचारी कार्यालय आता है या नहीं, विकास योजना क्यों नहीं बनी और एनओसी को लेकर वहां क्या स्थिति है, इस बारे में फिलहाल कोई सूचना नहीं है। -शैलजा इस्सर, राज्य नगर एवं ग्राम योजनाकार, निदेशालय शिमला।
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विभागीय समन्वय की कमी का खामियाजा भी जनता ही भुगत रही है। एक ओर विद्युत बोर्ड के अधिशासी अभियंता मीटर लगाने के लिए एनओसी की अनिवार्यता खत्म होने की बात कह रहे हैं तो दूसरी ओर टीसीपी अधिकारी इसे आज भी जरूरी बता रहे हैं। अधिकारियों के इस विरोधाभास और आपसी तालमेल के अभाव ने आम जनता को असमंजस में डाल दिया है।
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हालांकि विभाग पंचायतों के माध्यम से एनओसी देने की बात कहता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आज तक इस विषय पर कोई प्रशिक्षण शिविर आयोजित नहीं किया गया। स्थानीय निवासी पवन, रणजीत, रितेश, प्रवीण, नवीन और सुरजीत का कहना है कि सरकार की इस अनदेखी के कारण सुनियोजित विकास केवल फाइलों तक सीमित रह गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि परागपुर में तुरंत नियमित कर्मचारी की तैनाती की जाए, ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर हो सके।
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साडा गरली-परागपुर की किसी भी गतिविधि की मुझे कोई जानकारी नहीं है। कर्मचारी कार्यालय आता है या नहीं, विकास योजना क्यों नहीं बनी और एनओसी को लेकर वहां क्या स्थिति है, इस बारे में फिलहाल कोई सूचना नहीं है। -शैलजा इस्सर, राज्य नगर एवं ग्राम योजनाकार, निदेशालय शिमला।