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परोपकार, पुण्य और दान जैसे सत्कर्मों को अपनाना जरूरी : अंकुश कृष्ण
Sat, 29 Aug 2026 11:24 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:24 AM IST
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। देहरा स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर में रक्षाबंधन पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस दौरान मंदिर प्रबंधक एवं पुजारी मनोज शर्मा की अगुवाई में देहरा शहर में विशाल शोभायात्रा निकाली।
कथा के दौरान पंडित अंकुश कृष्ण गोपाल महाराज ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। हालांकि केवल कथा सुनना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि जीवन में परोपकार, पुण्य और दान जैसे सत्कर्मों को भी अपनाना चाहिए।
ठाकुर जी सत्य, चित और आनंद के स्वरूप में विराजमान हैं। भगवान के चरणों में ही वास्तविक आनंद की अनुभूति होती है, इसलिए उन्हें सच्चिदानंद कहा जाता है। संसार में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह सुखी नहीं है। जो भगवान श्रीहरि के चरणों का दास बन जाता है, वह वास्तविक सुख की अनुभूति कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि भोजन का कण और संतों का क्षण कभी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। कलियुग में यदि मनुष्य सुख और शांति चाहता है तो उसे श्रीहरि के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर अच्छे कर्म करने चाहिए। इस अवसर पर मनोज शर्मा, सुशील शर्मा, त्रिलोक शर्मा, पवन बजरंगी और सत्यव्रत शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।
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कथा के दौरान पंडित अंकुश कृष्ण गोपाल महाराज ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। हालांकि केवल कथा सुनना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि जीवन में परोपकार, पुण्य और दान जैसे सत्कर्मों को भी अपनाना चाहिए।
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ठाकुर जी सत्य, चित और आनंद के स्वरूप में विराजमान हैं। भगवान के चरणों में ही वास्तविक आनंद की अनुभूति होती है, इसलिए उन्हें सच्चिदानंद कहा जाता है। संसार में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह सुखी नहीं है। जो भगवान श्रीहरि के चरणों का दास बन जाता है, वह वास्तविक सुख की अनुभूति कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि भोजन का कण और संतों का क्षण कभी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। कलियुग में यदि मनुष्य सुख और शांति चाहता है तो उसे श्रीहरि के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर अच्छे कर्म करने चाहिए। इस अवसर पर मनोज शर्मा, सुशील शर्मा, त्रिलोक शर्मा, पवन बजरंगी और सत्यव्रत शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।