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जिला भर में सैकड़ों डाक्टरों ने दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक
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धर्मशाला के क्षेत्रीय अस्पताल में दो घंटे को पैनडाउन हड़ताल के दौरान ओपीडी छोड़कर बाहर खड़े सीए?
- फोटो : Kangra
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धर्मशाला। जिला कांगड़ा में वीरवार सुबह 9:30 से 11:00 बजे तक विभिन्न अस्पतालों में 500 से अधिकर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर पेन डाउन स्ट्राइक की। इस दौरान किसी भी अस्पताल में दो घंटों के लिए एक भी मरीज को नहीं देखा गया। दों घंटे तक सभी अस्पतालों में ओपोडी बंद रही। इस दौरान केवल इमरजेंसी सेंवाएं ही जारी रहीं।
वीरवार को जोनल अस्पताल धर्मशाला में करीब 38 डॉक्टरों ने सुबह दो घंटे पेन डाउन स्ट्राइक की। इस कारण अस्पताल आए मरीजों और साथ आए तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं, साढ़े 11 बजे जैसे ही स्ट्राइक खत्म हुई और सभी ओपीडी के बाद मरीजों का तांता लग गया। इस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो यह हड़ताल 17 फरवरी तक ऐसे ही दो घंटों के लिए जारी रहेगी। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। पहले सरकार ने 4-9-14 स्कीम को बंद कर दिया और अब उनके पे स्केल को भी कम कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनके साथ न्याय नहीं करती है, तब यह हड़ताल जारी रहेगी। इसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। सीएमओ कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉक्टरों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके चलते एक सप्ताह तक जिला भर में सुबह दो घंटों के लिए पेन डाउन स्ट्राइक का निर्णय लिया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से पंजाब की तर्ज पर हिमाचल में डॉक्टरों को वेतन देने की मांग की है।
सीएमओ ने बताया कि जिला कांगड़ा में एक मेडिकल कॉलेज, एक जोनल अस्पताल, 18 सिविल अस्पताल, 19 सीएचसी और 87 पीएचसी हैं। उन्होंने बताया कि उनके अंतर्गत 400 के करीब डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा टांडा मेडिकल कॉलेज और जोनल अस्पताल धर्मशाला में 100 से अधिक डाक्टर तैनात है।
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सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया
जसूर (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल नूरपुर में डॉक्टरों ने दो घंटे के लिए पेन डाउन स्ट्राइक कर अपना रोष हिमाचल प्रदेश सरकार के खिलाफ जताया। अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारी सुशील शर्मा ने कहा कि सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने पेन डाउन स्ट्राइक की, लेकिन इस अवधि में इमरजेंसी मरीजों को फिलहाल देखा गया। शर्मा ने कहा कि अभी फिलहाल यूनियन के निर्देश पर यह हड़ताल रोजाना दो घंटे चलेगी। अगर सरकार ने मांगों पर गौर नहीं किया फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल का विगुल बजा दिया जाएगा। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल में भी अपनी सेवाएं दी हैं, लेकिन सरकार ने बस डॉक्टरों की पीठ ही थपथपाई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दौरान चिकित्सकों के काम की प्रशंसा की, लेकिन प्रदेश सरकार ने कोई मागों पर गौर नहीं किया। शर्मा ने कहा कि पे कमीशन की मांग को लेकर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
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वीरवार को जोनल अस्पताल धर्मशाला में करीब 38 डॉक्टरों ने सुबह दो घंटे पेन डाउन स्ट्राइक की। इस कारण अस्पताल आए मरीजों और साथ आए तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं, साढ़े 11 बजे जैसे ही स्ट्राइक खत्म हुई और सभी ओपीडी के बाद मरीजों का तांता लग गया। इस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो यह हड़ताल 17 फरवरी तक ऐसे ही दो घंटों के लिए जारी रहेगी। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। पहले सरकार ने 4-9-14 स्कीम को बंद कर दिया और अब उनके पे स्केल को भी कम कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनके साथ न्याय नहीं करती है, तब यह हड़ताल जारी रहेगी। इसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। सीएमओ कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉक्टरों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके चलते एक सप्ताह तक जिला भर में सुबह दो घंटों के लिए पेन डाउन स्ट्राइक का निर्णय लिया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से पंजाब की तर्ज पर हिमाचल में डॉक्टरों को वेतन देने की मांग की है।
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सीएमओ ने बताया कि जिला कांगड़ा में एक मेडिकल कॉलेज, एक जोनल अस्पताल, 18 सिविल अस्पताल, 19 सीएचसी और 87 पीएचसी हैं। उन्होंने बताया कि उनके अंतर्गत 400 के करीब डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा टांडा मेडिकल कॉलेज और जोनल अस्पताल धर्मशाला में 100 से अधिक डाक्टर तैनात है।
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सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया
जसूर (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल नूरपुर में डॉक्टरों ने दो घंटे के लिए पेन डाउन स्ट्राइक कर अपना रोष हिमाचल प्रदेश सरकार के खिलाफ जताया। अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारी सुशील शर्मा ने कहा कि सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने पेन डाउन स्ट्राइक की, लेकिन इस अवधि में इमरजेंसी मरीजों को फिलहाल देखा गया। शर्मा ने कहा कि अभी फिलहाल यूनियन के निर्देश पर यह हड़ताल रोजाना दो घंटे चलेगी। अगर सरकार ने मांगों पर गौर नहीं किया फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल का विगुल बजा दिया जाएगा। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल में भी अपनी सेवाएं दी हैं, लेकिन सरकार ने बस डॉक्टरों की पीठ ही थपथपाई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दौरान चिकित्सकों के काम की प्रशंसा की, लेकिन प्रदेश सरकार ने कोई मागों पर गौर नहीं किया। शर्मा ने कहा कि पे कमीशन की मांग को लेकर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।