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Kangra News: तिब्बती लोकतंत्र दिवस की 65वीं वर्षगांठ पर दलाई लामा के योगदान को सराहा

Wed, 03 Sep 2025 09:03 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Wed, 03 Sep 2025 09:03 AM IST
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Dalai Lama's contribution appreciated on the 65th anniversary of Tibetan Democracy Day
मैक्लोडगंज में तिब्बतियन डेमाक्रेसी डे पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए कलाकार
धर्मशाला। तिब्बती लोकतंत्र दिवस की 65वीं वर्षगांठ पर मंगलवार को मैक्लोडगंज स्थित चुगलाखंग मठ परिसर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग, तिब्बती संसद के स्पीकर खेनपो सोनम तेनपेल, मंत्रिपरिषद (काशाग), केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अधिकारी, बौद्ध धर्मगुरु और बड़ी संख्या में तिब्बती नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में स्पीकर खेनपो सोनम तेनपेल ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के दूरदर्शी नेतृत्व और तिब्बती जनता की अटूट भावना को नमन किया। उन्होंने कहा कि निर्वासन में रहकर भी हमारा लोकतंत्र, स्वतंत्रता संग्राम की बुनियाद बना हुआ है। यह दिन हमें लोकतंत्र के महत्व और संघर्ष की जीवंतता की याद दिलाता है।
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पिछले 65 वर्षों में तिब्बती लोकतंत्र चार महत्वपूर्ण चरणों से गुजरा, जिसके तहत वर्ष 1991 में निर्वासन में ‘तिब्बतियन-इन-एक्जाइल चार्टर’ की घोषणा। 2001 में कालोन त्रिपा (प्रधानमंत्री) का प्रत्यक्ष चुनाव हुआ। 2011 में दलाई लामा की ओर से सभी राजनीतिक अधिकार निर्वाचित नेतृत्व को हस्तांतरित करना शामिल हैं। काशाग ने हाल ही में धर्मशाला में आयोजित 15वें तिब्बती धार्मिक सम्मेलन का उल्लेख करते हुए बताया कि सम्मेलन में दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया पर चीन के किसी भी हस्तक्षेप को सख्ती से अस्वीकार किया गया। यह सर्वसम्मति से पारित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव था।
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काशाग ने कहा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म पारंपरिक धार्मिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। इसमें चीन सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह जिम्मेदारी गदेन फोड़्रांग ट्रस्ट और तिब्बती बौद्ध परंपराओं के वरिष्ठ आचार्यों की होगी। चीन की ओर से अपहृत 11वें पंचेन लामा की रिहाई की मांग भी दोहराई गई। काशाग ने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सहित सात देशों के मानवाधिकार दूतों ने भी धार्मिक स्वतंत्रता और तिब्बती पुनर्जन्म प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप न करने का समर्थन किया है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बती आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन है। समारोह के अंत में काशाग और तिब्बती संसद ने प्रार्थना की कि 14वें दलाई लामा दीर्घायु हों और जल्द ही तिब्बत और निर्वासन में रह रहे तिब्बती समुदायों का पुनर्मिलन हो सके। उन्होंने तिब्बत की न्यायोचित संघर्ष को शीघ्र सफलता मिलने की भी कामना की।
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बाक्स:
गदेन फोड्रांग पुरस्कार और शिक्षा में उत्कृष्टता
हर वर्ष की भांति इस बार भी केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के शिक्षा विभाग की ओर से गदेन फोड्रांग पुरस्कार घोषित किए गए। यह पुरस्कार मानविकी, विज्ञान और वाणिज्य की तीनों धाराओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन तिब्बती छात्रों को प्रदान किए गए।

बाक्स:
अगले चुनाव में जिम्मेदारी और एकता का आह्वान
निर्वासित तिब्बती संसद ने 2026 में होने वाले प्रधानमंत्री और संसद चुनावों में निर्वासन में रह रहे सभी तिब्बतियों से जिम्मेदारी और एकता का परिचय देने की अपील की गई। संसद ने चीन सरकार द्वारा तिब्बती धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मिटाने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि तिब्बती जनता आज भी अपने संघर्ष और पहचान के प्रति प्रतिबद्ध है।

मैक्लोडगंज में तिब्बतियन डेमाक्रेसी डे पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए कलाकार

मैक्लोडगंज में तिब्बतियन डेमाक्रेसी डे पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए कलाकार

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