{"_id":"69b01102fc3f88903e029b80","slug":"cu-launches-international-initiative-to-reduce-seismic-risk-kangra-news-c-95-1-ssml1008-223641-2026-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: भूकंपीय जोखिम कम करने के लिए सीयू ने शुरू की अंतरराष्ट्रीय पहल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: भूकंपीय जोखिम कम करने के लिए सीयू ने शुरू की अंतरराष्ट्रीय पहल
विज्ञापन
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कांगड़ा जिले में भूकंप के खतरों के आकलन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना शुरू की है। ‘भारत में भूकंपीय खतरे का आकलन और लचीलापन सुदृढ़ करना’ विषय पर आधारित यह परियोजना वर्ष 2030 तक चलेगी।
इसे भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) की ‘नेचुरल एनवायरनमेंट रिसर्च काउंसिल’ द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है। इस शोध समूह में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, एस्टन बिजनेस स्कूल, लैंकेस्टर विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) कोलकाता, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान शामिल हैं।
हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. दीपक पंत इस परियोजना के सामाजिक विज्ञान घटक का नेतृत्व कर रहे हैं। वे यूके के एस्टन बिजनेस स्कूल के डॉ. कोमल राज आर्याल के साथ मिलकर इस पर कार्य कर रहे हैं। शोध में वैज्ञानिक उन सक्रिय फॉल्ट लाइनों (भ्रंश रेखाओं) की पहचान कर रहे हैं, जिनसे भविष्य में भूकंप आने की आशंका है। इसके लिए हिमाचल में भूकंप मापन यंत्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं, शोध का दूसरा हिस्सा इस पर केंद्रित है कि स्थानीय लोग भूकंप के जोखिम को कैसे समझते हैं और आपदा की स्थिति में प्रभावी तैयारी में उनके सामने क्या बाधाएं आती हैं। यह पहल 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप जैसी ऐतिहासिक घटनाओं से सीख लेते हुए समुदायों को भविष्य के भू-जलवायु संबंधी खतरों के प्रति तैयार करेगी।
विज्ञापन
इसे भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) की ‘नेचुरल एनवायरनमेंट रिसर्च काउंसिल’ द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है। इस शोध समूह में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, एस्टन बिजनेस स्कूल, लैंकेस्टर विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) कोलकाता, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान शामिल हैं।
विज्ञापन
हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. दीपक पंत इस परियोजना के सामाजिक विज्ञान घटक का नेतृत्व कर रहे हैं। वे यूके के एस्टन बिजनेस स्कूल के डॉ. कोमल राज आर्याल के साथ मिलकर इस पर कार्य कर रहे हैं। शोध में वैज्ञानिक उन सक्रिय फॉल्ट लाइनों (भ्रंश रेखाओं) की पहचान कर रहे हैं, जिनसे भविष्य में भूकंप आने की आशंका है। इसके लिए हिमाचल में भूकंप मापन यंत्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं, शोध का दूसरा हिस्सा इस पर केंद्रित है कि स्थानीय लोग भूकंप के जोखिम को कैसे समझते हैं और आपदा की स्थिति में प्रभावी तैयारी में उनके सामने क्या बाधाएं आती हैं। यह पहल 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप जैसी ऐतिहासिक घटनाओं से सीख लेते हुए समुदायों को भविष्य के भू-जलवायु संबंधी खतरों के प्रति तैयार करेगी।