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Kangra News: कांगड़ा के लिंग अनुपात पर दो विभागों के आंकड़ों से उलझन
Tue, 17 Feb 2026 09:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 17 Feb 2026 09:18 AM IST
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धर्मशाला। जिला कांगड़ा में लिंग अनुपात के आंकड़ों को लेकर हर साल की तरह एक बार भी उलझन है। बेटी है अनमोल के नारे करने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के डाटा की भिन्नता सरकारी आंकड़ों की संकलन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। ताजा आंकड़ों में स्वास्थ्य विभाग ने जिले का लिंग अनुपात 922 दर्ज किया है, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसे 925 प्रति एक हजार पुरुष बता रहा है।
आंकड़ों में यह अंतर मुख्य रूप से डाटा एकत्रित करने की पद्धति के कारण है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट अस्पतालों में होने वाले जन्म पंजीकरण और प्रसव के रिकॉर्ड पर आधारित होती है। इसके विपरीत महिला एवं बाल विकास विभाग अपने जमीनी स्तर के तंत्र यानी आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रत्येक घर की सूचनाएं जुटाता है। वर्तमान में विभाग इन्हीं आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है और उम्मीद है कि वर्ष 2025-26 की अंतिम रिपोर्ट आगामी मार्च महीने में सार्वजनिक की जाएगी।
आंकड़ों में असमानता का एक बड़ा कारण कांगड़ा जिले की भौगोलिक स्थिति भी है। जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं। स्वास्थ्य विभाग इनका पंजीकरण जिले के रिकॉर्ड में तो कर लेता है, लेकिन वे बच्चे वास्तव में कांगड़ा के निवासी नहीं होते। दूसरी ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल अपने कार्यक्षेत्र के निवासियों का डेटा दर्ज करती हैं। इस प्रक्रिया से आंकड़ों में विसंगति पैदा हो जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों के आधार पर होते हैं। जिले के बॉर्डर क्षेत्रों के अस्पतालों में आसपास के जिलों के लोग भी डिलीवरी के लिए पहुंचते हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग और हमारे विभाग के आंकड़ों में मेल नहीं होता। -अशोक कुमार शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग
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आंकड़ों में यह अंतर मुख्य रूप से डाटा एकत्रित करने की पद्धति के कारण है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट अस्पतालों में होने वाले जन्म पंजीकरण और प्रसव के रिकॉर्ड पर आधारित होती है। इसके विपरीत महिला एवं बाल विकास विभाग अपने जमीनी स्तर के तंत्र यानी आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रत्येक घर की सूचनाएं जुटाता है। वर्तमान में विभाग इन्हीं आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है और उम्मीद है कि वर्ष 2025-26 की अंतिम रिपोर्ट आगामी मार्च महीने में सार्वजनिक की जाएगी।
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आंकड़ों में असमानता का एक बड़ा कारण कांगड़ा जिले की भौगोलिक स्थिति भी है। जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं। स्वास्थ्य विभाग इनका पंजीकरण जिले के रिकॉर्ड में तो कर लेता है, लेकिन वे बच्चे वास्तव में कांगड़ा के निवासी नहीं होते। दूसरी ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल अपने कार्यक्षेत्र के निवासियों का डेटा दर्ज करती हैं। इस प्रक्रिया से आंकड़ों में विसंगति पैदा हो जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों के आधार पर होते हैं। जिले के बॉर्डर क्षेत्रों के अस्पतालों में आसपास के जिलों के लोग भी डिलीवरी के लिए पहुंचते हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग और हमारे विभाग के आंकड़ों में मेल नहीं होता। -अशोक कुमार शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग