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Kangra News: भूमिहीन बन हथियाई सरकारी जमीन, फिर होटल कारोबारियों को बेच डाले प्लॉट
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धर्मशाला। भूमिहीन बनकर सरकार से जमीन हासिल करने के बाद इसे महंगे दामों पर होटल कारोबारियों को बेचने का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय धर्मशाला से सटी ग्राम पंचायत ‘सोकणी दा कोट’ में इस तरह के मामले सामने आए हैं।
प्रदेश में अलग-अलग दलों की सरकारोंं के समय पंचायत में लगभग 20 से अधिक भूमिहीन परिवारों को घर निर्माण के लिए तीन मरले भूमि आवंटित हुई। मगर वर्तमान में इक्का-दुक्का भूमिहीन परिवारों ने ही यहां मकान बनाए हैं, जबकि शेष आवंटित भूमि का महंगे दामों पर क्रय-विक्रय हो चुका है।
बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से भूमिहीनों को आवंटित भूमि पर अब होटल और रेस्तरां आदि बन गए हैं। नियमानुसार भूमिहीनों को मकान बनाने के लिए आवंटित भूमि को बेचा नहीं जा सकता हैं। बकायदा जमाबंदी पर भी आवंटित भूमि का विशेष नोट लिखा जाता है। जानकारों का कहना है कि जो भूमि लाभार्थी परिवारों ने बेची है, वह उन्हें नौतोड़ योजना के तहत मिली है। उसे वे एक विशेष समयसीमा पूरी होने के बाद बेच सकते हैं। हालांकि जिस जमीन का क्रय-विक्रय हुआ और होटल तथा रेस्तरां आदि बने हैं, वह सरकारी भूमि भूमिहीनों को मिलने वाली तीन-तीन मरले जमीन के प्लाट्स हैं या नौतोड़ भूमि के प्लाट्स यह जांच का विषय बना हुआ है।
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सोकणी दी कोट पंचायत में सरकार की ओर से आवंटित भूमि को बेचने के मामले का रिकॉर्ड जांचा जाएगा। अगर मकान निर्माण के लिए आवंटित भूमि को बेचा होगा तो नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-गिरीराज ठाकुर, तहसीलदार, धर्मशाला।
अगर कहीं भूमिहीनों को आवंटित सरकारी भूमि की गलत तरीके से खरीद-फरोख्त हुई तो राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के कार्यालय में शिकायत की जा सकती है। शिकायत के बाद मामले की जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-बलवीर सिंह, एसपी, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला।
एचपीयू के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र की भूमि की निशानदेही से हड़कंप
खनियारा के मोहली में हिमाचल प्रदेश विवि के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र की जमीन की राजस्व विभाग ने गत दिवस ही निशानदेही की प्रक्रिया पूरी की है। निशानदेही के दौरान 20 से अधिक मकान व दुकानें अवैध पाई गई हैं। निशानदेही के बाद अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। यहां विवि की 200 कनाल भूमि है, लेकिन विवि भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। विवि प्रशासन की ओर से इन्हें नोटिस भेजने और पीपी एक्ट में कार्रवाई अमल में लाई जाने की तैयारी है।
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प्रदेश में अलग-अलग दलों की सरकारोंं के समय पंचायत में लगभग 20 से अधिक भूमिहीन परिवारों को घर निर्माण के लिए तीन मरले भूमि आवंटित हुई। मगर वर्तमान में इक्का-दुक्का भूमिहीन परिवारों ने ही यहां मकान बनाए हैं, जबकि शेष आवंटित भूमि का महंगे दामों पर क्रय-विक्रय हो चुका है।
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बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से भूमिहीनों को आवंटित भूमि पर अब होटल और रेस्तरां आदि बन गए हैं। नियमानुसार भूमिहीनों को मकान बनाने के लिए आवंटित भूमि को बेचा नहीं जा सकता हैं। बकायदा जमाबंदी पर भी आवंटित भूमि का विशेष नोट लिखा जाता है। जानकारों का कहना है कि जो भूमि लाभार्थी परिवारों ने बेची है, वह उन्हें नौतोड़ योजना के तहत मिली है। उसे वे एक विशेष समयसीमा पूरी होने के बाद बेच सकते हैं। हालांकि जिस जमीन का क्रय-विक्रय हुआ और होटल तथा रेस्तरां आदि बने हैं, वह सरकारी भूमि भूमिहीनों को मिलने वाली तीन-तीन मरले जमीन के प्लाट्स हैं या नौतोड़ भूमि के प्लाट्स यह जांच का विषय बना हुआ है।
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सोकणी दी कोट पंचायत में सरकार की ओर से आवंटित भूमि को बेचने के मामले का रिकॉर्ड जांचा जाएगा। अगर मकान निर्माण के लिए आवंटित भूमि को बेचा होगा तो नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-गिरीराज ठाकुर, तहसीलदार, धर्मशाला।
अगर कहीं भूमिहीनों को आवंटित सरकारी भूमि की गलत तरीके से खरीद-फरोख्त हुई तो राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के कार्यालय में शिकायत की जा सकती है। शिकायत के बाद मामले की जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-बलवीर सिंह, एसपी, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला।
एचपीयू के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र की भूमि की निशानदेही से हड़कंप
खनियारा के मोहली में हिमाचल प्रदेश विवि के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र की जमीन की राजस्व विभाग ने गत दिवस ही निशानदेही की प्रक्रिया पूरी की है। निशानदेही के दौरान 20 से अधिक मकान व दुकानें अवैध पाई गई हैं। निशानदेही के बाद अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। यहां विवि की 200 कनाल भूमि है, लेकिन विवि भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। विवि प्रशासन की ओर से इन्हें नोटिस भेजने और पीपी एक्ट में कार्रवाई अमल में लाई जाने की तैयारी है।