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Kangra News: सेराथाना स्कूल में कैमिस्ट्री शिक्षक ही नहीं, 32 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर
Sat, 26 Sep 2026 07:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 26 Sep 2026 07:10 AM IST
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धर्मशाला। प्रदेश सरकार सरकारी शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने और सीबीएसई पैटर्न को बढ़ावा देने के दावे कर रही है। मगर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। नगरोटा बगवां के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेराथाना में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मुख्य विषय शिक्षक ही उपलब्ध नहीं है।
स्कूल में 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान (कैमिस्ट्री) पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल में जमा दो की विज्ञान कक्षा में कुल 32 विद्यार्थी नामांकित हैं। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन नियमित शिक्षक की तैनाती न होने से छात्रों का पाठ्यक्रम काफी पिछड़ गया है।
वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के इस अहम दौर में विद्यार्थियों को बिना मार्गदर्शक के खुद ही पढ़ाई का बोझ उठाना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि जब नींव ही मजबूत नहीं होगी, तो बच्चे बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं में कैसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। सरकारी स्कूलों की इस खस्ताहाल व्यवस्था पर स्थानीय समाजसेवी सौरभ कौंडल ने कड़ा रोष जताया है।
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उन्होंने कहा कि सेराथाना स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण, गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इन बच्चों के परिवारों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे निजी स्कूलों की भारी फीस दे सकें या शहर जाकर महंगी कोचिंग ले सकें। यदि सरकारी स्कूलों में ही विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होंगे, तो इन होनहार बच्चों के सामने भविष्य को लेकर संकट खड़ा हो जाएगा।
स्कूल में विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए विभाग से पत्राचार किया गया है। जल्द ही कैमिस्ट्री शिक्षक डेपुटेशन पर स्कूल पहुंच रहे हैं। वह एक सप्ताह के भीतर अपनी सेवाएं शुरू कर देंगे। -संदीप अवस्थी, प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेराथाना
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स्कूल में 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान (कैमिस्ट्री) पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल में जमा दो की विज्ञान कक्षा में कुल 32 विद्यार्थी नामांकित हैं। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन नियमित शिक्षक की तैनाती न होने से छात्रों का पाठ्यक्रम काफी पिछड़ गया है।
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वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के इस अहम दौर में विद्यार्थियों को बिना मार्गदर्शक के खुद ही पढ़ाई का बोझ उठाना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि जब नींव ही मजबूत नहीं होगी, तो बच्चे बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं में कैसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। सरकारी स्कूलों की इस खस्ताहाल व्यवस्था पर स्थानीय समाजसेवी सौरभ कौंडल ने कड़ा रोष जताया है।
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उन्होंने कहा कि सेराथाना स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण, गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इन बच्चों के परिवारों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे निजी स्कूलों की भारी फीस दे सकें या शहर जाकर महंगी कोचिंग ले सकें। यदि सरकारी स्कूलों में ही विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होंगे, तो इन होनहार बच्चों के सामने भविष्य को लेकर संकट खड़ा हो जाएगा।
स्कूल में विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए विभाग से पत्राचार किया गया है। जल्द ही कैमिस्ट्री शिक्षक डेपुटेशन पर स्कूल पहुंच रहे हैं। वह एक सप्ताह के भीतर अपनी सेवाएं शुरू कर देंगे। -संदीप अवस्थी, प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेराथाना