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Kangra News: मिलावट की जांच के इंतजाम तीन साल से खा रहे जंग
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धर्मशाला। त्योहारी सीजन में बाजारों में मिठाइयों, दूध, पनीर, खोया और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने लगी है लेकिन मिलावट की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के इंतजाम ही जंग खा रहे हैं।
करीब तीन साल पहले कांगड़ा जिले को मिलीं दो फूड सेफ्टी मोबाइल टेस्टिंग वैन स्टाफ के अभाव में अब तक इस्तेमाल नहीं हो पाई हैं। लंबे समय से खड़ी वैन की बैटरियां भी खराब हो चुकी हैं, जबकि जिले में खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों के स्वीकृत चार पदों में से दो ही भरे हैं।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने और मिलावट पर रोक लगाने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग पर है। त्योहारी सीजन में विभाग को विशेष अभियान चलाकर मिठाई की दुकानों, डेयरियों, किराना प्रतिष्ठानों और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े अन्य संस्थानों का निरीक्षण करना पड़ता है।
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इसके लिए पर्याप्त संख्या में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा स्टाफ से पूरे जिले को कवर करना चुनौती बना हुआ है।
विभाग को मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन मिलने के बाद उम्मीद थी कि खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर प्रारंभिक जांच तेजी से हो सकेगी। मगर जब से ये दो वैन मिली हैं, उनका आज तक इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
एक ही स्थान पर खड़े ये वाहन जंग खा रहे हैं और उनकी बैटरियां खराब हो गई हैं। सरकार की ओर से आज तक स्टाफ तक मुहैया नहीं करवाया गया है। स्टाफ की कमी का सीधा असर जिलेभर में निरीक्षण व्यवस्था पर पड़ रहा है। एक अधिकारी को कई क्षेत्रों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है।
चंबा जिले का भी अतिरिक्त कार्यभार
जिला कांगड़ा में खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन मौजूदा समय में केवल दो ही अधिकारी हैं। इसमें से एक के पास चंबा जिले का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
स्टाफ की कमी के बारे में समय-समय पर सरकार को अवगत करवाया जा रहा है। इसके अलावा फूड सेफ्टी वाहनों के लिए जब स्टाफ मिल जाएगा तो उसका इस्तेमाल किया जाएगा। - डॉ. सविता ठाकुर, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग, कांगड़ा
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करीब तीन साल पहले कांगड़ा जिले को मिलीं दो फूड सेफ्टी मोबाइल टेस्टिंग वैन स्टाफ के अभाव में अब तक इस्तेमाल नहीं हो पाई हैं। लंबे समय से खड़ी वैन की बैटरियां भी खराब हो चुकी हैं, जबकि जिले में खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों के स्वीकृत चार पदों में से दो ही भरे हैं।
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खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने और मिलावट पर रोक लगाने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग पर है। त्योहारी सीजन में विभाग को विशेष अभियान चलाकर मिठाई की दुकानों, डेयरियों, किराना प्रतिष्ठानों और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े अन्य संस्थानों का निरीक्षण करना पड़ता है।
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इसके लिए पर्याप्त संख्या में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा स्टाफ से पूरे जिले को कवर करना चुनौती बना हुआ है।
विभाग को मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन मिलने के बाद उम्मीद थी कि खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर प्रारंभिक जांच तेजी से हो सकेगी। मगर जब से ये दो वैन मिली हैं, उनका आज तक इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
एक ही स्थान पर खड़े ये वाहन जंग खा रहे हैं और उनकी बैटरियां खराब हो गई हैं। सरकार की ओर से आज तक स्टाफ तक मुहैया नहीं करवाया गया है। स्टाफ की कमी का सीधा असर जिलेभर में निरीक्षण व्यवस्था पर पड़ रहा है। एक अधिकारी को कई क्षेत्रों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है।
चंबा जिले का भी अतिरिक्त कार्यभार
जिला कांगड़ा में खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन मौजूदा समय में केवल दो ही अधिकारी हैं। इसमें से एक के पास चंबा जिले का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
स्टाफ की कमी के बारे में समय-समय पर सरकार को अवगत करवाया जा रहा है। इसके अलावा फूड सेफ्टी वाहनों के लिए जब स्टाफ मिल जाएगा तो उसका इस्तेमाल किया जाएगा। - डॉ. सविता ठाकुर, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग, कांगड़ा