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Kangra News: प्राचार्य-अधीक्षक के अधिकार छीनने पर टांडा मेडिकल कॉलेज में आक्रोश
Thu, 07 Aug 2025 09:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 07 Aug 2025 09:10 AM IST
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कांगड़ा। मेडिकल कॉलेज टांडा के शिक्षक कल्याण संघ ने प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना का कड़ा विरोध किया है, जिसमें राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में प्राचार्य और चिकित्सा अधीक्षक के वित्तीय और प्रतिवेदन अधिकार संयुक्त/अतिरिक्त निदेशक को सौंपे जाने का प्रावधान किया गया है। संघ ने इसे मेडिकल कॉलेजों की प्रशासनिक स्वायत्तता और कार्यप्रणाली के खिलाफ बताया है।
संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप अत्री और अन्य पदाधिकारियों ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना संख्या 114642 (2023) से न केवल वरिष्ठ संकाय सदस्यों की कार्यप्रेरणा प्रभावित होगी, बल्कि मरीजों की देखभाल और संस्थानों के प्रशासनिक संचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि वेतन, जीपीएफ और बजट जैसे महत्वपूर्ण मामलों का नियंत्रण संस्थान प्रमुख के पास ही होना चाहिए, जैसा कि अन्य सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रचलन है। संघ ने आपत्ति जताई कि दशकों के अनुभव वाले चिकित्सा अधीक्षक को उन अधिकारियों को रिपोर्ट करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिनके पास न तो समान अनुभव है और न ही ग्रेड पे।
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संघ ने इस निर्णय को वर्ष 2024 में निरस्त की गई अधिसूचना जैसी बताया और मुख्यमंत्री से तत्काल प्रभाव से इसे रद्द करने की मांग की है। संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों की बार-बार अनदेखी से चिकित्सा समुदाय और मरीजों में सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।
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संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप अत्री और अन्य पदाधिकारियों ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना संख्या 114642 (2023) से न केवल वरिष्ठ संकाय सदस्यों की कार्यप्रेरणा प्रभावित होगी, बल्कि मरीजों की देखभाल और संस्थानों के प्रशासनिक संचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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ज्ञापन में कहा गया है कि वेतन, जीपीएफ और बजट जैसे महत्वपूर्ण मामलों का नियंत्रण संस्थान प्रमुख के पास ही होना चाहिए, जैसा कि अन्य सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रचलन है। संघ ने आपत्ति जताई कि दशकों के अनुभव वाले चिकित्सा अधीक्षक को उन अधिकारियों को रिपोर्ट करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिनके पास न तो समान अनुभव है और न ही ग्रेड पे।
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संघ ने इस निर्णय को वर्ष 2024 में निरस्त की गई अधिसूचना जैसी बताया और मुख्यमंत्री से तत्काल प्रभाव से इसे रद्द करने की मांग की है। संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों की बार-बार अनदेखी से चिकित्सा समुदाय और मरीजों में सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।