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धर्मशाला में नहीं सर्जरी विशेषज्ञ, ऑपरेशन के लिए टांडा जाने को मजबूर
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amarujala abhiyan health
धर्मशाला। जोनल अस्पताल धर्मशाला में करीब एक माह से सर्जरी की ओपीडी पर ताला लटका हुआ है। इसके चलते जोनल अस्पताल धर्मशाला मेें आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को सर्जरी के लिए टांडा अस्पताल भेजा जा रहा। कोरोना की तीसरी लहर खत्म होने के बाद टांडा अस्पताल में रोजाना उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां रोजाना करीब 2000 ओपीडी है। ऐसे हालात में धर्मशाला से टांडा अस्पताल जाने वाले मरीजों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। धर्मशाला अस्पताल आने वाले मरीजों ने सरकार से मांग की है कि सर्जरी विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए।
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि अस्पताल में सर्जरी और ईएनटी विशेषज्ञ के खाली पदों का मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में लाया गया है। सरकार से इन पदों को जल्द भरने का अनुरोध किया गया है।
----------कोट्स----------
टांडा में इलाज करवाना बुजुर्गों के लिए कठिन : देशराज
बुजुर्ग देशराज ने बताया कि धर्मशाला अस्पताल लोग उम्मीद लेकर आते हैं कि उनके मर्ज का उपचार घर के पास ही हो जाएगा। यहां सर्जरी का डॉक्टर ही नहीं है। इससे टांडा अस्पताल में लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है।
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सर्जरी के लिए टांडा अस्पताल का करना होगा रुख: राजेश
अस्पताल में आए राजेश ने बताया कि उम्मीद लगाकर आए थे कि धर्मशाला में सर्जरी होने से पत्थरी का उपचार हो जाएगा। सर्जरी के डॉक्टर का पद खाली होने से अब टांडा या निजी अस्पताल का रुख करना पड़ेगा।
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क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि अस्पताल में सर्जरी और ईएनटी विशेषज्ञ के खाली पदों का मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में लाया गया है। सरकार से इन पदों को जल्द भरने का अनुरोध किया गया है।
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टांडा में इलाज करवाना बुजुर्गों के लिए कठिन : देशराज
बुजुर्ग देशराज ने बताया कि धर्मशाला अस्पताल लोग उम्मीद लेकर आते हैं कि उनके मर्ज का उपचार घर के पास ही हो जाएगा। यहां सर्जरी का डॉक्टर ही नहीं है। इससे टांडा अस्पताल में लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है।
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सर्जरी के लिए टांडा अस्पताल का करना होगा रुख: राजेश
अस्पताल में आए राजेश ने बताया कि उम्मीद लगाकर आए थे कि धर्मशाला में सर्जरी होने से पत्थरी का उपचार हो जाएगा। सर्जरी के डॉक्टर का पद खाली होने से अब टांडा या निजी अस्पताल का रुख करना पड़ेगा।

जोनल अस्पताल धर्मशाला में करीब एक माह से बंद पड़ा सर्जिकल वार्ड।- संवाद- फोटो : Kangra