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भरण-पोषण में असमर्थ बालिग बेटी भी गुजारा भत्ते की हकदार : अदालत

Wed, 23 Sep 2026 07:18 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Wed, 23 Sep 2026 07:18 AM IST
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Adult daughter unable to support herself also entitled to maintenance allowance: Court
देहरा (कांगड़ा)। स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ अविवाहित बेटी 18 वर्ष की आयु पूरी करने यानी बालिग होने के बाद भी पिता से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। फैमिली कोर्ट देहरा की अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत ने नादौन की एक महिला और उनकी बेटी के मामले में यह अहम व्यवस्था दी है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर न होने तक पिता अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। इसके साथ ही अदालत ने पिता को बेटी के बालिग होने के बाद से अब तक की बकाया राशि का भुगतान करने के भी आदेश दिए हैं। अदालत ने मां और बेटी दोनों का गुजारा भत्ता 4500 और 4000 से बढ़ाकर 15-15 हजार रुपये यानी कुल 30 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है।
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अदालत ने पाया कि मां-बेटी की स्वतंत्र आय का कोई साधन नहीं है, जबकि पति एक सरकारी विभाग में अधिकारी हैं। पति ने जिरह के दौरान 80 हजार रुपये वेतन मिलने और 30 हजार रुपये मासिक कटौती की बात स्वीकार की थी। अदालत ने उनकी वास्तविक आय कम से कम 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह मानते हुए यह फैसला सुनाया।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर नए सिरे से हुई थी सुनवाई
बेटी के बालिग होने पर फैमिली कोर्ट ने 25 अक्तूबर 2021 को गुजारा भत्ता रोकने का आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट के ‘अभिलाषा बनाम प्रकाश’ मामले की नजीर के तहत नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए थे। दोबारा सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने पाया कि बेटी अविवाहित है, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और खुद कमाने में सक्षम नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर स्पष्ट किया कि शादी होने तक उसे पिता से भरण-पोषण पाने का अधिकार है। बकाया राशि के भुगतान पर विचार के लिए मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 तय की गई है।
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