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Kangra News: बुजुर्गों की पेंशन पर आधार का अड़ंगा
Tue, 22 Sep 2026 08:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 22 Sep 2026 08:15 AM IST
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धर्मशाला। आधार कार्ड में दर्ज गलत जन्मतिथि और उसमें संशोधन के कड़े नियम बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन की राह में बड़ा अड़ंगा बन गए हैं। जन्मतिथि दुरुस्त करवाने के लिए अनिवार्य रूप से 10वीं कक्षा का प्रमाणपत्र मांगे जाने से उन बुजुर्गों के पेंशन मामले लटक गए हैं, जो अशिक्षित हैं या जिन्होंने कभी स्कूल का रुख नहीं किया।
उम्र प्रमाणित करने के लिए शैक्षणिक दस्तावेज न होने के चलते आधार सेवा केंद्रों पर उनकी जन्मतिथि में सुधार नहीं हो पा रहा है। नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के विकास खंड बड़ोह की ग्राम पंचायत सदूं वरगा की प्रधान अर्चना कुमारी ने बताया कि पंचायत कार्यालय में आए दिन बुजुर्ग आधार में गलत जन्मतिथि और पेंशन दस्तावेजों के सत्यापन में आ रही रुकावटों की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। बुजुर्गों के पास 10वीं का प्रमाणपत्र न होने से संशोधन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में दशकों पुराना जन्म रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पंचायत स्तर पर भी कई दशक पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित न होने के कारण बुजुर्गों के लिए वास्तविक जन्मतिथि को प्रमाणित करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। छह अगस्त 2026 को जारी जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन में देरी से पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारियों के आदेश का प्रावधान तो किया गया है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन की तिथि केंद्र सरकार की अधिसूचना पर निर्भर है।
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प्रधान अर्चना कुमारी ने सरकार से मांग उठाई है कि जिन बुजुर्गों के पुराने जन्म रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए सरल और समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि पहली से नौवीं कक्षा तक के पुराने स्कूली अभिलेख, पंचायत के उपलब्ध रिकॉर्ड अथवा अन्य वैकल्पिक वैध दस्तावेजों को परिस्थितियों के आधार पर जन्मतिथि प्रमाण के रूप में मान्यता दी जाए। ब्यूरो
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उम्र प्रमाणित करने के लिए शैक्षणिक दस्तावेज न होने के चलते आधार सेवा केंद्रों पर उनकी जन्मतिथि में सुधार नहीं हो पा रहा है। नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के विकास खंड बड़ोह की ग्राम पंचायत सदूं वरगा की प्रधान अर्चना कुमारी ने बताया कि पंचायत कार्यालय में आए दिन बुजुर्ग आधार में गलत जन्मतिथि और पेंशन दस्तावेजों के सत्यापन में आ रही रुकावटों की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। बुजुर्गों के पास 10वीं का प्रमाणपत्र न होने से संशोधन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में दशकों पुराना जन्म रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पंचायत स्तर पर भी कई दशक पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित न होने के कारण बुजुर्गों के लिए वास्तविक जन्मतिथि को प्रमाणित करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। छह अगस्त 2026 को जारी जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन में देरी से पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारियों के आदेश का प्रावधान तो किया गया है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन की तिथि केंद्र सरकार की अधिसूचना पर निर्भर है।
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प्रधान अर्चना कुमारी ने सरकार से मांग उठाई है कि जिन बुजुर्गों के पुराने जन्म रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए सरल और समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि पहली से नौवीं कक्षा तक के पुराने स्कूली अभिलेख, पंचायत के उपलब्ध रिकॉर्ड अथवा अन्य वैकल्पिक वैध दस्तावेजों को परिस्थितियों के आधार पर जन्मतिथि प्रमाण के रूप में मान्यता दी जाए। ब्यूरो