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थंका पेंटर सारिका ने नवाजीं सू की
Kangra
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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धर्मशाला। भारत की कला जगत की विशिष्ट महिलाओं में से एक तथा हिमाचल प्रदेश की पहली महिला थंका पेंटर सारिका सिंह ने नई दिल्ली के लेडी श्रीराम कालेज में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की सम्मानित किया। 16 नवंबर को हुए इस कार्यक्र में सारिका ने सू की को तारा देवी की पेंटिंग प्रस्तुत की। प्राचीन बौद्ध परंपरा के अनुसार तारा देवी ज्ञान, शुद्धता एवं करुणा का प्रतीक मानी जाती हैं। इस कलाकृति द्वारा सारिका सिंह ने सू की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
सू की शुक्रवार को लेडी श्रीराम कॉलेज पहुंचकर चालीस साल पुरानी यादों में खो गईं। छात्रों और शिक्षकों के बीच पहुंचकर उन्होंने कहा, मुझे हमेशा मालूम था कि मैं इस ऑडिटोरियम में एक दिन जरूर आऊंगी। यहीं मैंने महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत ‘रघुपति राघव राजा राम’ सीखा था। 1962 से 64 तक राजनीति शास्त्र में स्नातक करने वाली सू की का कॉलेज पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। सारिका सिंह का हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अपना पेंटिंग स्टूडियो है। यहां वह प्राचीन बौद्ध कला थंका पेंटिंग के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए कार्य करती हैं।
क्या है थंका पेंटिंग
थंका पेंटिंग हिमालयन क्षेत्र की प्रसिद्ध बौद्ध कला है, जिसका जन्म भारत में ही हुआ था। सातवीं शताब्दी में यह कला पड़ोसी क्षेत्रों में गई, जहां इसका विकास हुआ। यह कला सोलहवीं शताब्दी तक अपनी पूरी पहचान बनाने में सफल हुई। इस कला के विकास पर नेपाली, चीनी व कश्मीरी कला का भी महत्वपूर्ण असर हुआ। भारत से विलुप्त हुई इस कला को एक बार फिर देश में वापस लाने एवं विकसित करने का प्रयास मास्टर लोचो एवं उनकी धर्मपत्नी सारिका सिंह द्वारा हिमाचल प्रदेश के ही प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण गांव कंडी (खन्यारा) में किया जा रहा है। उन्होंने मास्टर लोचो के सहयोग से पिछले बारह वर्षों में विश्व के कई देशों जिनमें अमेरिका, यूके, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आस्ट्रिया, जर्मनी आदि में इस कला की जागरूकता के लिए अनेक प्रदर्शनियां लगाईं।
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सू की शुक्रवार को लेडी श्रीराम कॉलेज पहुंचकर चालीस साल पुरानी यादों में खो गईं। छात्रों और शिक्षकों के बीच पहुंचकर उन्होंने कहा, मुझे हमेशा मालूम था कि मैं इस ऑडिटोरियम में एक दिन जरूर आऊंगी। यहीं मैंने महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत ‘रघुपति राघव राजा राम’ सीखा था। 1962 से 64 तक राजनीति शास्त्र में स्नातक करने वाली सू की का कॉलेज पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। सारिका सिंह का हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अपना पेंटिंग स्टूडियो है। यहां वह प्राचीन बौद्ध कला थंका पेंटिंग के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए कार्य करती हैं।
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क्या है थंका पेंटिंग
थंका पेंटिंग हिमालयन क्षेत्र की प्रसिद्ध बौद्ध कला है, जिसका जन्म भारत में ही हुआ था। सातवीं शताब्दी में यह कला पड़ोसी क्षेत्रों में गई, जहां इसका विकास हुआ। यह कला सोलहवीं शताब्दी तक अपनी पूरी पहचान बनाने में सफल हुई। इस कला के विकास पर नेपाली, चीनी व कश्मीरी कला का भी महत्वपूर्ण असर हुआ। भारत से विलुप्त हुई इस कला को एक बार फिर देश में वापस लाने एवं विकसित करने का प्रयास मास्टर लोचो एवं उनकी धर्मपत्नी सारिका सिंह द्वारा हिमाचल प्रदेश के ही प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण गांव कंडी (खन्यारा) में किया जा रहा है। उन्होंने मास्टर लोचो के सहयोग से पिछले बारह वर्षों में विश्व के कई देशों जिनमें अमेरिका, यूके, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आस्ट्रिया, जर्मनी आदि में इस कला की जागरूकता के लिए अनेक प्रदर्शनियां लगाईं।
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