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आखिर क्यों थर्रा रहा हिमाचल?
Kangra
Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
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धर्मशाला। भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील जोन फाइव में शामिल कांगड़ा जिला एक बार फिर दहशत में है। आखिर कांगड़ा के गर्भ में क्या चल रहा है? इस बात से शायद भूगर्भ विज्ञानी भी पूरी तरह वाकिफ नहीं हो पा रहे हैं। मंगलवार को आया भूकंप बेशक दो सेकंड का था, लेकिन यह झटका इतना झकझोर कर रख देने वाला था कि घरों और दफ्तरों की पूरी खिड़कियां एक दम से खड़खड़ा उठीं। जो जहां था वहां से उठकर बाहर निकल आया।
ठीक पांच बजकर 51 मिनट और 12 सेकंड पर महसूस किए गए इस भूकंप से हर कोई दहशत में है। इस झटके को कांगड़ा के तकरीबन अधिकांश लोगों ने महसूस किया। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की सुरक्षा में तैनात एक कर्मी ने बताया कि झटका इतने जोर का था कि ईवीएम भी झनझना उठीं। वहीं, लोगाें ने हिलते हुए पंखे और अन्य चीजों से इस झटके को महसूस किया। गौर हो कि पिछले माह के पहले हफ्ते में भी हिमाचल में लगातार चार दिनों तक जमीन हिलती रही है। देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक हिमालय में हो रही इस हलचल पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नड्डी स्थित भूकंप आब्जर्वेटरी के मुताबिक इस भूकंप की तीव्रता 4.1 थी। पिछले झटकों की तीव्रता भी रिक्टर पैमाने पर 2 से चार के बीच में आंकी गई है। हिमाचल की पहाड़ियों में भी भूकंप का केंद्र होने से इसे खतरे का संकेत माना जा रहा है। लेकिन अभी तक इन झटकों से किसी तरह के जान माल का नुकसान नहीं हुआ है। पर झटकों के बाद लोग 1905 के उस मंजर को याद कर सहम रहे हैं, जब यहां हजारों की जानें चली गई थीं। उपायुक्त केआर भारती के मुताबिक कांगड़ा और चंबा में महसूस किए गए इन झटकों से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।
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ठीक पांच बजकर 51 मिनट और 12 सेकंड पर महसूस किए गए इस भूकंप से हर कोई दहशत में है। इस झटके को कांगड़ा के तकरीबन अधिकांश लोगों ने महसूस किया। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की सुरक्षा में तैनात एक कर्मी ने बताया कि झटका इतने जोर का था कि ईवीएम भी झनझना उठीं। वहीं, लोगाें ने हिलते हुए पंखे और अन्य चीजों से इस झटके को महसूस किया। गौर हो कि पिछले माह के पहले हफ्ते में भी हिमाचल में लगातार चार दिनों तक जमीन हिलती रही है। देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक हिमालय में हो रही इस हलचल पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नड्डी स्थित भूकंप आब्जर्वेटरी के मुताबिक इस भूकंप की तीव्रता 4.1 थी। पिछले झटकों की तीव्रता भी रिक्टर पैमाने पर 2 से चार के बीच में आंकी गई है। हिमाचल की पहाड़ियों में भी भूकंप का केंद्र होने से इसे खतरे का संकेत माना जा रहा है। लेकिन अभी तक इन झटकों से किसी तरह के जान माल का नुकसान नहीं हुआ है। पर झटकों के बाद लोग 1905 के उस मंजर को याद कर सहम रहे हैं, जब यहां हजारों की जानें चली गई थीं। उपायुक्त केआर भारती के मुताबिक कांगड़ा और चंबा में महसूस किए गए इन झटकों से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।
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