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मंदिर न्यास की सुस्ती की हद...टेंट में भैरव की मूर्ति
Updated Wed, 20 Dec 2017 11:37 PM IST
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कपिल शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर न्यास को दुनिया भर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं से सालाना करोड़ों रुपये की आय होती है, लेकिन कुछ अरसा पहले प्राकृतिक आपदा में ध्वस्त हुए न्यास के अधीन प्राचीन भैरव मंदिर का निर्माण करवाने में बेहद सुस्ती बरती जा रही है। अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंच रही है। प्राचीन भैरव मंदिर तो पूरी तरह से प्राकृतिक आपदा में ध्वस्त हो गया था। अब प्राचीन भैरव मंदिर की मूर्ति एक टेंट के सहारे बिना छत के विराजमान है।
करोड़ों रुपये की आय के बावजूद मंदिर में टेक्निकल टीम को हजारों रुपये वेतन के रूप में हर माह दिए जा रहे हैं। टेक्निकल टीम की सुस्ती लोगों की समझ से परे है। ज्वालामुखी के बुद्धिजीवी वर्ग ने मंदिर के इस कुप्रंबधन पर कई सवाल उठाए हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था को पहुंच रही चोट
दुकानदार दीपक खौला का कहना है कि ज्वालामुखी मंदिर की टेक्निकल टीम जल्द भैरव मंदिर का निर्माण करवाए, इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। अशोक लवली युवा का कहना है कि वह भैरव बाबा के अनंत भक्त हैं। भैरव मंदिर का निर्माण नहीं हो रहा है। भैरव बाबा की मूर्ति को टैंट लगाया गया जो सही नही है। मंदिर प्रशासन देरी के लिए जिम्मेदार है। लोगों की आस्था को ठेस पंहुच रही है। वरिष्ठ नागरिक चरणदास सूद का कहना है कि ज्वालामुखी मंदिर न्यास की ओर से तत्काल इस प्राचीन मंदिर का निर्माण शुरू करवा कर लोगों को राहत देनी चाहिए। प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर का यूं टेंट लगाकर निरादर नहीं होना चाहिए। मंदिर के कुप्रंबधन के चलते देरी हो रही है।
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केसर सिंह दुकानदार का कहना है कि बाहरी राज्यों से श्रद्धालु भैरव मंदिर जाते हैं। ऐसे में ध्वस्त हुए मंदिर को देखकर उनकी आस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मंदिर प्रशासन को गंभीरता से इस कार्य को करना चाहिए।
समाजसेवी सूक्ष्म सूद का कहना है कि मंदिर न्यास पहले भी सवालों के घेरे में रहा है। मंदिर की टेक्निकल टीम की सुस्ती से यह सब हुआ है। इसका जवाब लोगों को देना पड़ेगा। समाजसेवी सुरजीत का कहना है कि लोगों की आस्था को देखते हुए अविलंब प्राचीन भैरव मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर न्यास को दुनिया भर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं से सालाना करोड़ों रुपये की आय होती है, लेकिन कुछ अरसा पहले प्राकृतिक आपदा में ध्वस्त हुए न्यास के अधीन प्राचीन भैरव मंदिर का निर्माण करवाने में बेहद सुस्ती बरती जा रही है। अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंच रही है। प्राचीन भैरव मंदिर तो पूरी तरह से प्राकृतिक आपदा में ध्वस्त हो गया था। अब प्राचीन भैरव मंदिर की मूर्ति एक टेंट के सहारे बिना छत के विराजमान है।
करोड़ों रुपये की आय के बावजूद मंदिर में टेक्निकल टीम को हजारों रुपये वेतन के रूप में हर माह दिए जा रहे हैं। टेक्निकल टीम की सुस्ती लोगों की समझ से परे है। ज्वालामुखी के बुद्धिजीवी वर्ग ने मंदिर के इस कुप्रंबधन पर कई सवाल उठाए हैं।
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श्रद्धालुओं की आस्था को पहुंच रही चोट
दुकानदार दीपक खौला का कहना है कि ज्वालामुखी मंदिर की टेक्निकल टीम जल्द भैरव मंदिर का निर्माण करवाए, इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। अशोक लवली युवा का कहना है कि वह भैरव बाबा के अनंत भक्त हैं। भैरव मंदिर का निर्माण नहीं हो रहा है। भैरव बाबा की मूर्ति को टैंट लगाया गया जो सही नही है। मंदिर प्रशासन देरी के लिए जिम्मेदार है। लोगों की आस्था को ठेस पंहुच रही है। वरिष्ठ नागरिक चरणदास सूद का कहना है कि ज्वालामुखी मंदिर न्यास की ओर से तत्काल इस प्राचीन मंदिर का निर्माण शुरू करवा कर लोगों को राहत देनी चाहिए। प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर का यूं टेंट लगाकर निरादर नहीं होना चाहिए। मंदिर के कुप्रंबधन के चलते देरी हो रही है।
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केसर सिंह दुकानदार का कहना है कि बाहरी राज्यों से श्रद्धालु भैरव मंदिर जाते हैं। ऐसे में ध्वस्त हुए मंदिर को देखकर उनकी आस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मंदिर प्रशासन को गंभीरता से इस कार्य को करना चाहिए।
समाजसेवी सूक्ष्म सूद का कहना है कि मंदिर न्यास पहले भी सवालों के घेरे में रहा है। मंदिर की टेक्निकल टीम की सुस्ती से यह सब हुआ है। इसका जवाब लोगों को देना पड़ेगा। समाजसेवी सुरजीत का कहना है कि लोगों की आस्था को देखते हुए अविलंब प्राचीन भैरव मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।