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बेरोजगार कार्यालय में शौचालय नहीं, कर्मचारी होते हैं लज्जित
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:42 PM IST
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बेरोजगार कार्यालय में शौचालय नहीं, लज्जित हो रहे कर्मचारी
देहरा में तीन माह से शौचालय बन होंने से बेरोजगार युवा भी हो रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। देहरा में बेरोजगार कार्यालय में शौचालय न होने से यहां नाम दर्ज करवाने आने वाले बेरोजगारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ाने में सरकारी दफ्तर भी अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम के तहत शुक्रवार को नाम का पंजीकरण करवाने देहरागोपीपुर पहुंचे युवाओं में अमित कुमार, धीरज कुमार, पवन कुमार, अरविंद कुमार, राधा देवी, साक्षी और सुषमा देवी ने का कहना था कि शर्म की बात है कि सरकारी ऑफिस में शौचालय नहीं हैं।
अमर उजाला की टीम ने जब शौचालय के बारे में कर्मचारियों से बातचीत की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बड़ा अजीब सा तर्क दिया। कर्मचारियों का यह भी कहना था कि जब नाम दर्ज करवाने आए लड़के या लड़कियां उनसे पूछते हैं तो उन्हें यह कहने में बड़ी शर्म महसूस होती है कि यहां शौचालय नहीं है। हैरानी तो इस बात की है कि यहां कर्मचारियों को यूरिन खुले में करना पड़ता है, जो किसी शर्म से कम नहीं है। उधर, कार्यालय में इंचार्ज की पोस्ट खाली है, जबकि अतिरिक्त कार्यभार लिपिक के पास है और वह इस समस्या पर कुछ बोलना नहीं चाहते। एसडीएम धनवीर ठाकुर का कहना है कि यह गंभीर मसला है। नगर परिषद के सफाई ठेकेदार को कहकर शीघ्र ही समस्या का समाधान करवाया जाएगा।
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देहरा में तीन माह से शौचालय बन होंने से बेरोजगार युवा भी हो रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। देहरा में बेरोजगार कार्यालय में शौचालय न होने से यहां नाम दर्ज करवाने आने वाले बेरोजगारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ाने में सरकारी दफ्तर भी अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम के तहत शुक्रवार को नाम का पंजीकरण करवाने देहरागोपीपुर पहुंचे युवाओं में अमित कुमार, धीरज कुमार, पवन कुमार, अरविंद कुमार, राधा देवी, साक्षी और सुषमा देवी ने का कहना था कि शर्म की बात है कि सरकारी ऑफिस में शौचालय नहीं हैं।
अमर उजाला की टीम ने जब शौचालय के बारे में कर्मचारियों से बातचीत की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बड़ा अजीब सा तर्क दिया। कर्मचारियों का यह भी कहना था कि जब नाम दर्ज करवाने आए लड़के या लड़कियां उनसे पूछते हैं तो उन्हें यह कहने में बड़ी शर्म महसूस होती है कि यहां शौचालय नहीं है। हैरानी तो इस बात की है कि यहां कर्मचारियों को यूरिन खुले में करना पड़ता है, जो किसी शर्म से कम नहीं है। उधर, कार्यालय में इंचार्ज की पोस्ट खाली है, जबकि अतिरिक्त कार्यभार लिपिक के पास है और वह इस समस्या पर कुछ बोलना नहीं चाहते। एसडीएम धनवीर ठाकुर का कहना है कि यह गंभीर मसला है। नगर परिषद के सफाई ठेकेदार को कहकर शीघ्र ही समस्या का समाधान करवाया जाएगा।
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