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Kangra News: जिले में खुले 50 क्रेच केंद्रों में 55 पद खाली
Mon, 28 Sep 2026 02:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:05 AM IST
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धर्मशाला। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के 50 आंगनबाड़ी-कम-क्रेच केंद्रों में क्रेच कार्यकर्ता और सहायिका के करीब 55 पद खाली हैं। अभी तक 26 क्रेच कार्यकर्ता और 19 सहायिका के पद ही भरे जा सके हैं।
कार्यकर्ता को 5,500 और सहायिका को 3,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। सुबह 9 से शाम 5 बजे तक चलने वाले इन केंद्रों में छह माह से छह साल तक के बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य निगरानी, प्रारंभिक शिक्षा और सुरक्षित देखभाल की सुविधा दी जा रही है।
तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर भी मिलता है। सुबह नौ बजे से पांच बजे तक चलने वाली सेवाओं को वेतन कम मिलने और आवेदन करने के लिए 50,000 हजार वार्षिक आय की शर्त आवेदन कम होने का कारण बताई जा रही है। रीता, कमलेश और संतोष आदि का कहना है कि पूरे दिन केंद्र में सेवाएं देने के बावजूद मानदेय काफी कम है। महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में घर का खर्च चलाना मुश्किल है। कम मानदेय के कारण पदों के लिए रुचि कम है।
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52 नए केंद्रों का प्रस्ताव
महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले में 52 नए आंगनबाड़ी-कम-क्रेच केंद्र खोलने का प्रस्ताव शिमला भेजा है। इनमें बैजनाथ के 11, भवारना का एक, देहरा और धर्मशाला के चार-चार, इंदौरा के चार, कांगड़ा का एक, लंबागांव और नगरोटा बगवां के पांच-पांच, नूरपुर के 10, पंचरुखी के तीन और रैत के दो केंद्र प्रस्तावित हैं।
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जिले में 50 आंगनबाड़ी-कम-क्रेच केंद्र संचालित हैं। इनमें 26 क्रेच कार्यकर्ता और 19 सहायिका के पद भरे गए हैं। अन्य पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। -अशोक कुमार शर्मा, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग कांगड़ा
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कार्यकर्ता को 5,500 और सहायिका को 3,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। सुबह 9 से शाम 5 बजे तक चलने वाले इन केंद्रों में छह माह से छह साल तक के बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य निगरानी, प्रारंभिक शिक्षा और सुरक्षित देखभाल की सुविधा दी जा रही है।
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तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर भी मिलता है। सुबह नौ बजे से पांच बजे तक चलने वाली सेवाओं को वेतन कम मिलने और आवेदन करने के लिए 50,000 हजार वार्षिक आय की शर्त आवेदन कम होने का कारण बताई जा रही है। रीता, कमलेश और संतोष आदि का कहना है कि पूरे दिन केंद्र में सेवाएं देने के बावजूद मानदेय काफी कम है। महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में घर का खर्च चलाना मुश्किल है। कम मानदेय के कारण पदों के लिए रुचि कम है।
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52 नए केंद्रों का प्रस्ताव
महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले में 52 नए आंगनबाड़ी-कम-क्रेच केंद्र खोलने का प्रस्ताव शिमला भेजा है। इनमें बैजनाथ के 11, भवारना का एक, देहरा और धर्मशाला के चार-चार, इंदौरा के चार, कांगड़ा का एक, लंबागांव और नगरोटा बगवां के पांच-पांच, नूरपुर के 10, पंचरुखी के तीन और रैत के दो केंद्र प्रस्तावित हैं।
जिले में 50 आंगनबाड़ी-कम-क्रेच केंद्र संचालित हैं। इनमें 26 क्रेच कार्यकर्ता और 19 सहायिका के पद भरे गए हैं। अन्य पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। -अशोक कुमार शर्मा, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग कांगड़ा