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बीड़ बिलिंग से लौटने लगे विदेशी पायलट
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:38 PM IST
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राजकुमार सूद
बैजनाथ (कांगड़ा)। बीड़-बिलिंग घाटी में पैराग्लाइडिंग का सीजन लगभर समाप्त होने को है। सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमान अपने-अपने देशों को वापस चले गए हैं। अक्तूबर माह के अंत में एक दर्जन देशों के डेढ़ सौ से अधिक विदेशी पायलटों ने घाटी में दस्तक दी थी और डेढ़ माह तक बिलिंग घाटी विदेशी पायलटों से सराबोर रही।
विधानसभा चुनावों के चलते इस साल बीड़ बिलिंग में कोई प्रतियोगिता न होने के चलते और सात दिन के लिए उड़ानों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होने के कारण पायलटों ने समय से पूर्व ही अपने देशों के लिए वापसी कर ली है। वर्तमान में भारतीय सेना के डेढ़ दर्जन पायलट बिलिंग में अभ्यास उड़ानें भर रहे हैं। नवंबर के अंत में पैराग्लाइडिंग सीजन के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद है। बिलिंग में इसके अतिरिक्त पर्यटन विभाग से पंजीकृत 140 स्थानीय पायलट टैंडम उड़ानों को अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय पायलट बरसात के दो माह को छोड़ कर पूरा वर्ष टैंडम उड़ानें भरकर आजीविका कमाते हैं। अब घाटी के स्थानीय पायलटों को बर्फबारी का इंतजार है । उम्मीद की जा रही है कि बर्फबारी होने पर अन्य राज्यों के पर्यटक प्रदेश में दस्तक देंगे । बीड़ बिलिंग घाटी के पर्यटन व्यवसाय पर भी बर्फबारी का अनुकूल असर पड़ता है और भारी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक घाटी में आते हैं। हालांकि इस वर्ष सीजन के जल्द समाप्त होने पर बीड़ के पर्यटन व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ा है और घाटी में पूर्व के वर्षों की अपेक्षा कम रौनक रही है।
बाक्स
हादसों से दूर रहा सीजन
इस वर्ष पैराग्लाइडिंग सीजन दुर्घटनाओं से दूर रहा है। मात्र एक विदेशी पायलट तकनीकी कारणों से पालमपुर के पास बंदला की पहाड़ियों में आपातकालीन स्थिति में लैंड कर गया था और उसके पीछे चल रहे अन्य दो विदेशी पायलटों को पहले पायलट की सुरक्षा के लिए लैंड करना पड़ा था। बाद में तीनों पायलटों को घटना के अगले दिन हेलिकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित निकाला गया था।
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बैजनाथ (कांगड़ा)। बीड़-बिलिंग घाटी में पैराग्लाइडिंग का सीजन लगभर समाप्त होने को है। सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमान अपने-अपने देशों को वापस चले गए हैं। अक्तूबर माह के अंत में एक दर्जन देशों के डेढ़ सौ से अधिक विदेशी पायलटों ने घाटी में दस्तक दी थी और डेढ़ माह तक बिलिंग घाटी विदेशी पायलटों से सराबोर रही।
विधानसभा चुनावों के चलते इस साल बीड़ बिलिंग में कोई प्रतियोगिता न होने के चलते और सात दिन के लिए उड़ानों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होने के कारण पायलटों ने समय से पूर्व ही अपने देशों के लिए वापसी कर ली है। वर्तमान में भारतीय सेना के डेढ़ दर्जन पायलट बिलिंग में अभ्यास उड़ानें भर रहे हैं। नवंबर के अंत में पैराग्लाइडिंग सीजन के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद है। बिलिंग में इसके अतिरिक्त पर्यटन विभाग से पंजीकृत 140 स्थानीय पायलट टैंडम उड़ानों को अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय पायलट बरसात के दो माह को छोड़ कर पूरा वर्ष टैंडम उड़ानें भरकर आजीविका कमाते हैं। अब घाटी के स्थानीय पायलटों को बर्फबारी का इंतजार है । उम्मीद की जा रही है कि बर्फबारी होने पर अन्य राज्यों के पर्यटक प्रदेश में दस्तक देंगे । बीड़ बिलिंग घाटी के पर्यटन व्यवसाय पर भी बर्फबारी का अनुकूल असर पड़ता है और भारी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक घाटी में आते हैं। हालांकि इस वर्ष सीजन के जल्द समाप्त होने पर बीड़ के पर्यटन व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ा है और घाटी में पूर्व के वर्षों की अपेक्षा कम रौनक रही है।
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हादसों से दूर रहा सीजन
इस वर्ष पैराग्लाइडिंग सीजन दुर्घटनाओं से दूर रहा है। मात्र एक विदेशी पायलट तकनीकी कारणों से पालमपुर के पास बंदला की पहाड़ियों में आपातकालीन स्थिति में लैंड कर गया था और उसके पीछे चल रहे अन्य दो विदेशी पायलटों को पहले पायलट की सुरक्षा के लिए लैंड करना पड़ा था। बाद में तीनों पायलटों को घटना के अगले दिन हेलिकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित निकाला गया था।
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