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कांगड़ा भाजपा पर भारी पड़ी बाली कांग्रेस
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:45 PM IST
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कांगड़ा के चारों मंत्रियों की कूटनीति फेल
केसीसी बैंक के बाद जिला परिषद चुनाव में भी काम नहीं आई रणनीति
पीएम के जन्मदिन पर हिमाचल में भाजपा को हार का तोहफा
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में जयराम सरकार की सियासी कूटनीति एक बार फिर फेल हो गई। केसीसी बैंक में अपनी पार्टी का अध्यक्ष बनाने की लॉबिंग में नाकाम रहने के बाद अब जिला परिषद के उपाध्यक्ष के चुनाव में भी भाजपा को बड़ा झटका लगा है। डेढ़ महीने से जिप चुनाव में जीत के लिए रणनीति बना रहे जिला के चारों मंत्री विपिन परमार, किशन कपूर, विक्रम ठाकुर और सरवीण चौधरी की राजनीतिक साख दांव पर लग गई। जिप चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित हार मिली। भाजपा उम्मीदवार को 55 में से महज 20 वोट मिले। खासकर विपिन परमार और किशन कपूर की जोड़ी एक बार फिर से कुछ कमाल नहीं कर पाई। मंत्री विक्रम ठाकुर अपने ही हलके के उम्मीदवार को जिता नहीं पाए। जिप चुनाव में जीत के लिए रणनीति बनाने को कांगड़ा जिला से बाहर से बुलाए गए मंत्री वीरेंद्र कंवर भी जीत के लिए मुफीद नहीं बन पाए।
मंत्रियों के साथ भाजपा के विधायकों ने भी जीत के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाया था। हार के बाद सभी भाजपा नेता मायूस होकर चुपचाप लौट गए, जबकि कांग्रेस ने काफी देर तक जिला परिषद हाल के बाहर जश्न मनाया।
ग्रेस ने अपना एक भी बड़ा नेता उतारे बगैर भाजपा को बड़े अंतराल से धूल चटाई। सुधीर और बाली ने परदे के पीछे से कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की भूमिका बांधी। सूत्रों के अनुसार जिप चुनाव में भाजपा की लुटिया उनके अपने ही पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग करने डुबोई। उपाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा के 6 पार्षद सियासी लार टपका रहे थे। यह सियासी लार ही भाजपा के लिए परेशानी कारण बन गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ही भाजपा को सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस से निष्कासित पूर्व उपाध्यक्ष गगन ठाकुर को भी अपने पाले में करने का भाजपा को कोई फायदा नहीं हुआ।
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परिधि गृह धर्मशाला में विपिन परमार, किशन कपूर, विक्रम ठाकुर, सरवीण चौधरी, वीरेंद्र कंवर रणनीति बनाकर जीत के लिए पूरी तरह आश्वास्त हो गए थे, लेकिन उनकी रणनीति को कांग्रेस के सियासी चक्रव्यूह ने पस्त कर दिया। रविवार रात को परिधि गृृह में एक मंत्री ने भाजपा के साथ 32 पार्षद होने का दावा किया था, जो सुबह तक 28 तक पहुंच गया। 28 सदस्य भाजपा विधायकों की गाड़ियों में ही जिला परिषद हॉल तक आए, लेकिन हॉल में पहुंचने के बाद वोट सिर्फ 20 ही मिले। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को कांगड़ा में दूसरा बड़ा सियासी झटका लगा है।
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि कांग्रेस का कोई नेता जिला परिषद सदस्यों के साथ नहीं गया था। न ही कांग्रेस नेताओं ने जिप सदस्यों के साथ बैठक की है। यह सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत की जीत है। उधर, पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को जनता ने आईना दिखाया है। अभी तो यह ट्रेलर था, पूरी फिल्म कांग्रेस लोकसभा चुनाव में दिखाएगी। पूर्व विधायक अजय महाजन ने कहा कि जिप चुनाव में भाजपा का राजनीतिक शो फेल हो गया। बड़े बड़े मंत्रियों की साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति जनता ने फेल कर दी।
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केसीसी बैंक के बाद जिला परिषद चुनाव में भी काम नहीं आई रणनीति
पीएम के जन्मदिन पर हिमाचल में भाजपा को हार का तोहफा
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में जयराम सरकार की सियासी कूटनीति एक बार फिर फेल हो गई। केसीसी बैंक में अपनी पार्टी का अध्यक्ष बनाने की लॉबिंग में नाकाम रहने के बाद अब जिला परिषद के उपाध्यक्ष के चुनाव में भी भाजपा को बड़ा झटका लगा है। डेढ़ महीने से जिप चुनाव में जीत के लिए रणनीति बना रहे जिला के चारों मंत्री विपिन परमार, किशन कपूर, विक्रम ठाकुर और सरवीण चौधरी की राजनीतिक साख दांव पर लग गई। जिप चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित हार मिली। भाजपा उम्मीदवार को 55 में से महज 20 वोट मिले। खासकर विपिन परमार और किशन कपूर की जोड़ी एक बार फिर से कुछ कमाल नहीं कर पाई। मंत्री विक्रम ठाकुर अपने ही हलके के उम्मीदवार को जिता नहीं पाए। जिप चुनाव में जीत के लिए रणनीति बनाने को कांगड़ा जिला से बाहर से बुलाए गए मंत्री वीरेंद्र कंवर भी जीत के लिए मुफीद नहीं बन पाए।
मंत्रियों के साथ भाजपा के विधायकों ने भी जीत के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाया था। हार के बाद सभी भाजपा नेता मायूस होकर चुपचाप लौट गए, जबकि कांग्रेस ने काफी देर तक जिला परिषद हाल के बाहर जश्न मनाया।
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ग्रेस ने अपना एक भी बड़ा नेता उतारे बगैर भाजपा को बड़े अंतराल से धूल चटाई। सुधीर और बाली ने परदे के पीछे से कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की भूमिका बांधी। सूत्रों के अनुसार जिप चुनाव में भाजपा की लुटिया उनके अपने ही पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग करने डुबोई। उपाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा के 6 पार्षद सियासी लार टपका रहे थे। यह सियासी लार ही भाजपा के लिए परेशानी कारण बन गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ही भाजपा को सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस से निष्कासित पूर्व उपाध्यक्ष गगन ठाकुर को भी अपने पाले में करने का भाजपा को कोई फायदा नहीं हुआ।
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परिधि गृह धर्मशाला में विपिन परमार, किशन कपूर, विक्रम ठाकुर, सरवीण चौधरी, वीरेंद्र कंवर रणनीति बनाकर जीत के लिए पूरी तरह आश्वास्त हो गए थे, लेकिन उनकी रणनीति को कांग्रेस के सियासी चक्रव्यूह ने पस्त कर दिया। रविवार रात को परिधि गृृह में एक मंत्री ने भाजपा के साथ 32 पार्षद होने का दावा किया था, जो सुबह तक 28 तक पहुंच गया। 28 सदस्य भाजपा विधायकों की गाड़ियों में ही जिला परिषद हॉल तक आए, लेकिन हॉल में पहुंचने के बाद वोट सिर्फ 20 ही मिले। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को कांगड़ा में दूसरा बड़ा सियासी झटका लगा है।
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि कांग्रेस का कोई नेता जिला परिषद सदस्यों के साथ नहीं गया था। न ही कांग्रेस नेताओं ने जिप सदस्यों के साथ बैठक की है। यह सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत की जीत है। उधर, पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को जनता ने आईना दिखाया है। अभी तो यह ट्रेलर था, पूरी फिल्म कांग्रेस लोकसभा चुनाव में दिखाएगी। पूर्व विधायक अजय महाजन ने कहा कि जिप चुनाव में भाजपा का राजनीतिक शो फेल हो गया। बड़े बड़े मंत्रियों की साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति जनता ने फेल कर दी।