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व्यवस्था कमेटियों में नहीं दिखा तालमेल
Updated Thu, 08 Feb 2018 11:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। नगरोटा बगवां में प्रशासनिक तौर पर हुई बड़े स्तर की मॉकड्रिल के दौरान घायलों को चिकित्सा सहायता तो मुहैया हुई, लेकिन बचाव कार्यों को सुचारु बनाने के लिए गठित कमेटियों में आपसी तालमेल नजर नहीं आया।
नगरोटा बगवां के दो स्थानों पर हुई मॉक ड्रिल के दौरान बचाव कार्यों को कॉलेज मैदान को एक केंद्रीय शिविर के रूप में स्थापित किया गया था, लेकिन हालत यह रही कि फेक भूकंप के बचाव कार्यों के बाद घायलों और मृतकों की संख्या को लेकर कमेटियों के सदस्य एक दूसरे का मुंह देखते रहे। मुख्य शिविर में न तो फेक शवों का कोई अता पता था और न ही घायलों की सही संख्या पता चल पा रही थी। हालांकि इस मॉकड्रिल के लिए प्रशासन को सुबह 11 बजे के आसपास का समय अपेक्षित था, लेकिन सुबह 8:45 पर ही अचानक भूकंप की सूचना आते ही लगभग सवा नौ बजे प्रशासनिक अमला बचाव कार्यों के लिए सक्रिय हुआ। स्टेजिंग प्वाइंट के रूप में स्थापित राजकीय महाविद्यालय और पुराना बस अड्डा में भूकंप से हुए भारी नुकसान की सूचना मिलते ही बचाव कार्यों के अगुआ एसडीएम सिद्धार्थ आचार्य ने बचाव और ऑपरेशन कमेटी सदस्यों की सलाह पर टास्क फोर्सों को तुरंत रवाना कर बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग शुरू कर दी। घायलों को मुख्य शिविर में इलाज के लिए लाया गया। वहां पर बीएमओ की अगुआई में अन्य चिकित्सकों और पैरामेडिकल टीम ने घायलों को फौरी चिकित्सा उपलब्ध कराई। कुछ गंभीर घायलों को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन घायलों को वहां पहुंचाने में देरी भी सामने आई। इस सारे आयोजन के दौरान महाविद्यालय स्टाफ ने विद्यार्थियों को भूकंप आने की अचानक सूचना देकर कॉलेज कैंपस को खाली कराया। शॉर्ट सर्किट से कॉलेज भवन को लगी फेक आग पर काबू पाने की अग्निशमन विभाग ने मॉक ड्रिल की। पालमपुर के डीएसपी राजिंदर शर्मा की अगुवाई में 40 पुलिस कर्मियों ने ट्रैफिक नियंत्रण और घायलों की सहायता में अपनी भूमिका निभाई। लोक निर्माण विभाग के कर्मी आवश्यक मशीनरी के साथ बचाव कार्यों के लिए मुस्तैद रहे। नायब तहसीलदार की उपस्थिति में राजस्व विभाग के कर्मचारी किसी भी आर्थिक सहायता के लिए घायलों और मृतकों की संख्या का रिकॉर्ड दर्ज करते रहे। उधर, फेक भूकंप आते ही क्षेत्र के विद्यालयों में बचाव और सहायता की मॉकड्रिल आयोजित की गई।
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नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। नगरोटा बगवां में प्रशासनिक तौर पर हुई बड़े स्तर की मॉकड्रिल के दौरान घायलों को चिकित्सा सहायता तो मुहैया हुई, लेकिन बचाव कार्यों को सुचारु बनाने के लिए गठित कमेटियों में आपसी तालमेल नजर नहीं आया।
नगरोटा बगवां के दो स्थानों पर हुई मॉक ड्रिल के दौरान बचाव कार्यों को कॉलेज मैदान को एक केंद्रीय शिविर के रूप में स्थापित किया गया था, लेकिन हालत यह रही कि फेक भूकंप के बचाव कार्यों के बाद घायलों और मृतकों की संख्या को लेकर कमेटियों के सदस्य एक दूसरे का मुंह देखते रहे। मुख्य शिविर में न तो फेक शवों का कोई अता पता था और न ही घायलों की सही संख्या पता चल पा रही थी। हालांकि इस मॉकड्रिल के लिए प्रशासन को सुबह 11 बजे के आसपास का समय अपेक्षित था, लेकिन सुबह 8:45 पर ही अचानक भूकंप की सूचना आते ही लगभग सवा नौ बजे प्रशासनिक अमला बचाव कार्यों के लिए सक्रिय हुआ। स्टेजिंग प्वाइंट के रूप में स्थापित राजकीय महाविद्यालय और पुराना बस अड्डा में भूकंप से हुए भारी नुकसान की सूचना मिलते ही बचाव कार्यों के अगुआ एसडीएम सिद्धार्थ आचार्य ने बचाव और ऑपरेशन कमेटी सदस्यों की सलाह पर टास्क फोर्सों को तुरंत रवाना कर बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग शुरू कर दी। घायलों को मुख्य शिविर में इलाज के लिए लाया गया। वहां पर बीएमओ की अगुआई में अन्य चिकित्सकों और पैरामेडिकल टीम ने घायलों को फौरी चिकित्सा उपलब्ध कराई। कुछ गंभीर घायलों को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन घायलों को वहां पहुंचाने में देरी भी सामने आई। इस सारे आयोजन के दौरान महाविद्यालय स्टाफ ने विद्यार्थियों को भूकंप आने की अचानक सूचना देकर कॉलेज कैंपस को खाली कराया। शॉर्ट सर्किट से कॉलेज भवन को लगी फेक आग पर काबू पाने की अग्निशमन विभाग ने मॉक ड्रिल की। पालमपुर के डीएसपी राजिंदर शर्मा की अगुवाई में 40 पुलिस कर्मियों ने ट्रैफिक नियंत्रण और घायलों की सहायता में अपनी भूमिका निभाई। लोक निर्माण विभाग के कर्मी आवश्यक मशीनरी के साथ बचाव कार्यों के लिए मुस्तैद रहे। नायब तहसीलदार की उपस्थिति में राजस्व विभाग के कर्मचारी किसी भी आर्थिक सहायता के लिए घायलों और मृतकों की संख्या का रिकॉर्ड दर्ज करते रहे। उधर, फेक भूकंप आते ही क्षेत्र के विद्यालयों में बचाव और सहायता की मॉकड्रिल आयोजित की गई।
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