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तीन घंटे बाद पहुंची एनडीआरएफ टीम
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:33 AM IST
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तीन घंटे बाद पहुंची एनडीआरएफ टीम
घटनास्थल से 18 किलोमीटर दूर है एनडीआरएफ बटालियन
नूरपुर (कांगड़ा)। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल केंद्र हादसा स्थल से 18 किलोमीटर दूर होने के बावजूद तीन घंटे देरी से स्पॉट पर पहुंचा। जब तक राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम हादसा स्थल पर पहुंची, मृतक और घायल बच्चों को सड़क तक लोगों ने पहुंचा दिया था। हर साल आपदा प्रबंधन के नाम पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है, लेकिन ऐसे हादसों में आपदा प्रबंधन का कोई लाभ नहीं मिला पाया है। स्थानीय लोगों में एनडीआरएफ की टीम देरी से पहुंचने पर आक्रोश दिखा। उधर, एसडीएम नूरपुर आबिद हुुसैन ने कहा कि हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ केंद्र को अवगत करवा दिया था।
21 लोगों ने किया रक्तदान
हादसे के घायल बच्चों के लिए 21 लोगों ने रक्तदान किया। नूरपुर ब्लड डोनर क्लब के प्रधान राजीव पठानिया ने कहा कि उन्हें प्रशासन की ओर से 14 यूनिट रक्त देने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वहां जाकर 21 लोगों ने रक्तदान किया है। तीन लोगों ने पठानकोट अस्पताल में जाकर रक्तदान किया है।
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घटनास्थल से 18 किलोमीटर दूर है एनडीआरएफ बटालियन
नूरपुर (कांगड़ा)। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल केंद्र हादसा स्थल से 18 किलोमीटर दूर होने के बावजूद तीन घंटे देरी से स्पॉट पर पहुंचा। जब तक राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम हादसा स्थल पर पहुंची, मृतक और घायल बच्चों को सड़क तक लोगों ने पहुंचा दिया था। हर साल आपदा प्रबंधन के नाम पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है, लेकिन ऐसे हादसों में आपदा प्रबंधन का कोई लाभ नहीं मिला पाया है। स्थानीय लोगों में एनडीआरएफ की टीम देरी से पहुंचने पर आक्रोश दिखा। उधर, एसडीएम नूरपुर आबिद हुुसैन ने कहा कि हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ केंद्र को अवगत करवा दिया था।
21 लोगों ने किया रक्तदान
हादसे के घायल बच्चों के लिए 21 लोगों ने रक्तदान किया। नूरपुर ब्लड डोनर क्लब के प्रधान राजीव पठानिया ने कहा कि उन्हें प्रशासन की ओर से 14 यूनिट रक्त देने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वहां जाकर 21 लोगों ने रक्तदान किया है। तीन लोगों ने पठानकोट अस्पताल में जाकर रक्तदान किया है।
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