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Kangra News: वन भूमि अपने नाम करने के लिए 2,000 परिवारों ने पेश किए दावे
Thu, 12 Jun 2025 01:08 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 12 Jun 2025 01:08 AM IST
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धर्मशाला। दिसंबर 2005 से पहले तीन पुश्तों तक का वन भूमि पर कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस कड़ी में अभी जिला कांगड़ा से समिति के समक्ष करीब 2000 क्लेम प्राप्त हुए हैं। जिन लोगों ने वन भूमि पर अपने कब्जे का दावा किया है, समितियां उन कब्जों का मौके पर निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। जुलाई से जिलेभर में विभिन्न समितियों के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों को उपमंडल स्तरीय समितियां सत्यापित करेंगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने तीन पुश्तों तक का वन भूमि पर कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक दिलाने की घोषणा की है।
इसके बाद प्रदेशभर में वन अधिकार समितियों का गठन किया है। वन भूमि पर जीवन यापन करने वाले लोगों को आवेदन के लिए ग्राम सभा का अनुमोदन और दो लोगों की गवाही जरूरी होगी। ऐसे परिवारों को ग्राम सभा के माध्यम से वन अधिकार समिति के समक्ष आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभा सभी अनुमोदित मामले सत्यापन के लिए उपमंडल स्तरीय समिति को भेजेगी। उपमंडल स्तरीय समिति सभी मामलों के सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समिति को भेजेगी। उपायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति दावों का निपटारा और दस्तावेजीकरण कर स्वीकृति देगी, जिसके बाद दावेदार को भूमि का पट्टा देकर मालिकाना हक दिया जाएगा। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन परिवारों को वन भूमि पर कानूनी तौर पर मालिकाना हक मिलेगा। यह जमीनें राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित परिवारों के नाम चढ़ेंगी, ताकि भविष्य में वन भूमि पर रहने वाले किसी भी परिवार को उजड़ने का डर न सताए।
वर्ष 2005 से पहले तीन पुश्तों तक का वन भूमि पर कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिले में अभी तक करीब 2,000 परिवारों ने अपने क्लेम प्रस्तुत किए हैं। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन लोगों को वन भूमि पर मालिकाना हक मिलेगा।
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-हेमराज बैरवा, उपायुक्त कांगड़ा
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इसके बाद प्रदेशभर में वन अधिकार समितियों का गठन किया है। वन भूमि पर जीवन यापन करने वाले लोगों को आवेदन के लिए ग्राम सभा का अनुमोदन और दो लोगों की गवाही जरूरी होगी। ऐसे परिवारों को ग्राम सभा के माध्यम से वन अधिकार समिति के समक्ष आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभा सभी अनुमोदित मामले सत्यापन के लिए उपमंडल स्तरीय समिति को भेजेगी। उपमंडल स्तरीय समिति सभी मामलों के सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समिति को भेजेगी। उपायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति दावों का निपटारा और दस्तावेजीकरण कर स्वीकृति देगी, जिसके बाद दावेदार को भूमि का पट्टा देकर मालिकाना हक दिया जाएगा। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन परिवारों को वन भूमि पर कानूनी तौर पर मालिकाना हक मिलेगा। यह जमीनें राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित परिवारों के नाम चढ़ेंगी, ताकि भविष्य में वन भूमि पर रहने वाले किसी भी परिवार को उजड़ने का डर न सताए।
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वर्ष 2005 से पहले तीन पुश्तों तक का वन भूमि पर कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिले में अभी तक करीब 2,000 परिवारों ने अपने क्लेम प्रस्तुत किए हैं। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन लोगों को वन भूमि पर मालिकाना हक मिलेगा।
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-हेमराज बैरवा, उपायुक्त कांगड़ा