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कांगड़ा जिला के सिविल अस्पतालों की दशा

Thu, 15 Mar 2018 11:24 PM IST
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:24 PM IST
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कांगड़ा जिला के सिविल अस्पतालों की दशा
कांगड़ा जिला के सिविल अस्पतालों की दशा
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3. कांगड़ा अस्पताल में धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन
नागरिक अस्पताल कांगड़ा में आठ में से चार चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं। गायनी सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को टांडा रेफर किया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है। सुविधाओं के नाम पर ऑपरेशन थियेटर भी है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से ये सब सुविधाएं नाम की हैं। एक फार्मासिस्ट का पद खाली चल रहा है।
4. जयसिंहपुर अस्पताल का दर्जा बढ़ा, सुविधाएं नहीं
जयसिंहपुर नागरिक अस्पताल को बने चार साल हो गए हैं, लेकिन सुविधाएं सीएचसी से भी कम हैं। अस्पताल मात्र दो चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं, जबकि यहां के लिए छह पद सृजित हैं। पैरामेडिकल स्टाफ के 45 में से 32 पद रिक्त हैं। प्रदेश सरकार आज तक अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं कर पाई है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए पालमपुर से चिकित्सक आते थे, लेकिन, करीब एक साल वह भी यहां पर नहीं आते हैं।
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5. देहरा अस्पताल में भी नहीं बेहतर हालात
सिविल अस्पताल देहरा में डॉक्टरों के नौ पद स्वीकृत हैं। इनमेें से दो पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ में सिर्फ चीफ फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। देहरा अस्पताल में रोजाना 450 मरीज चेकअप को पहुंचते हैं। महीने में लगभग 30 मरीज टांडा रेफर किए जाते हैं। इसके अलावा हादसों में ज्यादा गंभीर घायलों को भी टांडा रेफर किया जाता है।
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6. तीन डॉक्टरों के सहारे जवाली अस्पताल
सिविल अस्पताल जवाली में डाक्टरों के छह पद स्वीकृत हैं, जिसमें से तीन रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा चीफ फार्मासिस्ट के दो, क्लर्क के दो, ड्राइवर के दो, एमएचएस का एक, वार्ड सिस्टर और स्टाफ नर्स का एक-एक, असिस्टेंट का एक, ओटीए का एक पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल में रोजाना करीब 300 से 400 तक मरीज आते है। अस्पताल की ईसीजी मशीन भी बंद कमरे में धूल फांक रही है। मौजूदा हालात में कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से क्षेत्र के लोगों को महंगे दामों पर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ रहा है।
7. सत्ता का शिकार हुआ शाहपुर अस्पताल
2016 में बने सिविल अस्पताल शाहपुर को अभी तक अपना भवन नहीं बना है। डाक्टरों के छह पद सृजित हैं, जिसमें से दो खाली चल रहे हैं। हालांकि, 2012 के चुनावों से पहले शाहपुर सीएचसी को नागरिक अस्पताल का दर्जा भाजपा सरकार ने दिया था, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में आते ही इसकी मान्यता को रद्द कर दिया। 2016 में शाहपुर को दोबारा सिविल अस्पताल का दर्जा मिला। इस समय अस्पताल में लैब टैक्नीशियन और ऑपरेशन थियेटर सहायक का पद रिक्त है।

8. बैजनाथ अस्पताल में नहीं अल्ट्रासाउंड सुविधा
नागरिक अस्पताल बैजनाथ में विशेषज्ञ चिकित्सकों, पैरा मेडिकल और लैब टेक्नीशियन के पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में स्त्री विशेषज्ञ, हड्डियों के विशेषज्ञ, बच्चों के डॉक्टर और सर्जन का पद रिक्त चल रहा है। पैरा मेडिकल स्टाफ के करीब एक दर्जन पद खाली हैं। अस्पताल में एक मेडिसन, एक नेत्र विशेषज्ञ, एक नाक, एक ईएनटी विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा अस्पताल अल्ट्रासाउंड की सुविधा से वंचित है।
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