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छोटा पड़ा टांडा अस्पताल का बर्न यूनिट
Updated Thu, 10 May 2018 11:53 PM IST
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छोटा पड़ गया टांडा अस्पताल का बर्न यूनिट
12 बैड की सुविधा, मरीज पहुंच गए दोगुना
अब सामान्य वार्डों में हो रहा आग से जले घायलों का उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज टांडा में स्वास्थ्य विभाग ने बर्न यूनिट तो खोल दिया है, लेकिन वहां पर सुविधा सिर्फ 12 बेड की है। नगरोटा सूरियां में सिलिंडर हादसे के बाद टांडा में लाए गए 22 घायलों के लिए यहां का नवनिर्मित बर्न यूनिट मजाक बनकर रह गया। बर्न यूनिट का भवन तो आलीशान है, लेकिन सुविधाएं नाम की। यही वजह थी कि बुधवार को इस हादसे में आए घायलों को बर्न यूनिट में दाखिल करने के बजाय सर्जिकल वार्ड में दाखिल कर दिया। वार्ड में पहले से ही सात रोगी दाखिल हैं। हादसे में बुरी तरह जख्मी घायलों को बर्न यूनिट में दाखिल करने के बजाय जनरल वार्डों में भेजा गया। लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से बने बर्न यूनिट में सिर्फ 12 बेडों का प्रावधान है। कांगड़ा के अलावा चंबा जिला से भी आग से जले घायलों को उपचार के लिए टांडा रेफर किया जाता है। बर्न यूनिट के लिए वेंटिलेटर की जरूरत इसलिए भी आवश्यक होती है कि कई बार जलने की प्रतिशतता अधिक होने की वजह से मरीज को सांस लेने में भी मुश्किल होती है। आग से जले मरीजों को वैसे भी अलग दाखिल करने का प्रावधान है क्योंकि इससे इंनफेक्शन बढ़ने का खतरा रहता है। टांडा मेडिकल कालेज के चिकित्सा अधीक्षक डा. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि बर्न यूनिट में 12 बेड का प्रावधान है। इस कारण अन्य मरीजों को दूसरे वार्डों में दाखिल किया गया।
लोकार्पण के दो महीने बाद शुरू हुआ था बर्न यूनिट
टांडा मेडिकल कॉलेज के बर्न यूनिट का लोकार्पण चार अक्तूबर 2017 को तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह ने शिमला से वीडियो कांफ्रेंसिंग से किया था। उस समय बर्न यूनिट का भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया था। फरवरी 2018 के बाद टांडा अस्पताल प्रबंधन ने बर्न यूनिट का शुरू किया था।
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12 बैड की सुविधा, मरीज पहुंच गए दोगुना
अब सामान्य वार्डों में हो रहा आग से जले घायलों का उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज टांडा में स्वास्थ्य विभाग ने बर्न यूनिट तो खोल दिया है, लेकिन वहां पर सुविधा सिर्फ 12 बेड की है। नगरोटा सूरियां में सिलिंडर हादसे के बाद टांडा में लाए गए 22 घायलों के लिए यहां का नवनिर्मित बर्न यूनिट मजाक बनकर रह गया। बर्न यूनिट का भवन तो आलीशान है, लेकिन सुविधाएं नाम की। यही वजह थी कि बुधवार को इस हादसे में आए घायलों को बर्न यूनिट में दाखिल करने के बजाय सर्जिकल वार्ड में दाखिल कर दिया। वार्ड में पहले से ही सात रोगी दाखिल हैं। हादसे में बुरी तरह जख्मी घायलों को बर्न यूनिट में दाखिल करने के बजाय जनरल वार्डों में भेजा गया। लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से बने बर्न यूनिट में सिर्फ 12 बेडों का प्रावधान है। कांगड़ा के अलावा चंबा जिला से भी आग से जले घायलों को उपचार के लिए टांडा रेफर किया जाता है। बर्न यूनिट के लिए वेंटिलेटर की जरूरत इसलिए भी आवश्यक होती है कि कई बार जलने की प्रतिशतता अधिक होने की वजह से मरीज को सांस लेने में भी मुश्किल होती है। आग से जले मरीजों को वैसे भी अलग दाखिल करने का प्रावधान है क्योंकि इससे इंनफेक्शन बढ़ने का खतरा रहता है। टांडा मेडिकल कालेज के चिकित्सा अधीक्षक डा. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि बर्न यूनिट में 12 बेड का प्रावधान है। इस कारण अन्य मरीजों को दूसरे वार्डों में दाखिल किया गया।
लोकार्पण के दो महीने बाद शुरू हुआ था बर्न यूनिट
टांडा मेडिकल कॉलेज के बर्न यूनिट का लोकार्पण चार अक्तूबर 2017 को तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह ने शिमला से वीडियो कांफ्रेंसिंग से किया था। उस समय बर्न यूनिट का भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया था। फरवरी 2018 के बाद टांडा अस्पताल प्रबंधन ने बर्न यूनिट का शुरू किया था।
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