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भेड़पालकों की भेड़-बकरी चोरी होना बड़ी चिंता
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:29 AM IST
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भेड़-बकरियां चोरी होने का मलाल
मुल्थान (कांगड़ा)। छोटा भंगाल क्षेत्र के सैकड़ों भेड़पालक सर्दियों के छह महीने निचले क्षेत्रों में काटने के बाद इन दिनों अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। भेड़ पालकों को इस बात का मलाल है कि निचले क्षेत्रों में उनकी भेड़-बकरियां चोरी हो जाती हैं लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है। भेड़पालक पलकु राम, राम सिंह, भीम सिंह, सिंधू राम, प्रेम चंद, सोनकी राम और निहाल चंद ने बताया कि अब नवंबर तक वह बड़ा भंगाल की पहाड़ियों में ही भेड़-बकरियों को चराएंगे। यहां पर उनकी भेड़-बकरियां सुरक्षित होती हैं लेकिन, नवंबर में जैसे ही वे निचले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं, तो उनके साथ ऐसी वारदातें होना शुरू हो जाती हैं। पुलिस में भी इस संबंध में शिकायतें दर्ज होती हैं। लेकिन, समस्या का समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों के 70 प्रतिशत लोग इस भेड़पालन व्यवसाय से जुड़े हैं। सरकार के पशुपालन विभाग की ओर से बरोट मुल्थान पलाचक, लोहारड़ी स्थानों पर शिविर लगाए जाएं, जिससे दूरदराज बड़ा भंगाल जोतों में भेड़ों को बीमारी न हो।
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मुल्थान (कांगड़ा)। छोटा भंगाल क्षेत्र के सैकड़ों भेड़पालक सर्दियों के छह महीने निचले क्षेत्रों में काटने के बाद इन दिनों अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। भेड़ पालकों को इस बात का मलाल है कि निचले क्षेत्रों में उनकी भेड़-बकरियां चोरी हो जाती हैं लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है। भेड़पालक पलकु राम, राम सिंह, भीम सिंह, सिंधू राम, प्रेम चंद, सोनकी राम और निहाल चंद ने बताया कि अब नवंबर तक वह बड़ा भंगाल की पहाड़ियों में ही भेड़-बकरियों को चराएंगे। यहां पर उनकी भेड़-बकरियां सुरक्षित होती हैं लेकिन, नवंबर में जैसे ही वे निचले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं, तो उनके साथ ऐसी वारदातें होना शुरू हो जाती हैं। पुलिस में भी इस संबंध में शिकायतें दर्ज होती हैं। लेकिन, समस्या का समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों के 70 प्रतिशत लोग इस भेड़पालन व्यवसाय से जुड़े हैं। सरकार के पशुपालन विभाग की ओर से बरोट मुल्थान पलाचक, लोहारड़ी स्थानों पर शिविर लगाए जाएं, जिससे दूरदराज बड़ा भंगाल जोतों में भेड़ों को बीमारी न हो।