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कश्मीर के किसानों की सुंगधित खेती से होगी आर्थिकी मजबूत
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:13 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पालमपुर(कांगड़ा)। प्रदेश के किसानों के बाद अब जम्मू कश्मीर के किसान भी सगंध खेती कर सकेंगे। इसके तहत किसान सगंधित फूलों सहित अन्य खेती से अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं। किसान सगंधित खेती से कैसे अपनी रोजी मजबूत करें, इसके लिए सीएसआईआर पालमपुर में जम्मू कश्मीर के रियासी जिला के किसानों को जागरूक किया गया। ओराम मिशन के तहत चलाए गए इस अभियान में अब प्रदेश के साथ जम्मू कश्मीर के किसानों को भी सगंध खेती के बारे वैज्ञानिकों ने जागरूक किया है। खास बात यह है कि इस सगंध फसलों को जंगली जानवरों का भी कोई डर नहीं होगा। लिहाजा, सगंधित फसल की लगातार बढ़ रही मांग को लेकर इससे किसान आर्थिकी रूप से मजबूत हो सकते हैं। जम्मू के रियासी जिला के करीब तीस किसानों ने सीएसआईआर पालमपुर में चले जागरुक शिविर में भाग लिया। इसके तहत किसानों को सगंधित गुलाब, जंगली गेंदा, मुश्कबाला, लैवेंडर, रोजमेरी आदि की खेती उत्पादन एवं मूल्यवर्धन के बारे में जानकारी दी। संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके सूद ने बताया कि ये सगंधित पौधे संसार में विभिन्न प्रकार के सगंधीय उद्योग, खाद्य उद्योग और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में उपयोग में लाए जाते हैं। इनकी वैश्विक मांग निरंतर बढ़ रही है। सीएसआईआर की ओर से अरोमा मिशन के तहत करीब साढ़े पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध फसलों को लगवाया जा रहा है।
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पालमपुर(कांगड़ा)। प्रदेश के किसानों के बाद अब जम्मू कश्मीर के किसान भी सगंध खेती कर सकेंगे। इसके तहत किसान सगंधित फूलों सहित अन्य खेती से अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं। किसान सगंधित खेती से कैसे अपनी रोजी मजबूत करें, इसके लिए सीएसआईआर पालमपुर में जम्मू कश्मीर के रियासी जिला के किसानों को जागरूक किया गया। ओराम मिशन के तहत चलाए गए इस अभियान में अब प्रदेश के साथ जम्मू कश्मीर के किसानों को भी सगंध खेती के बारे वैज्ञानिकों ने जागरूक किया है। खास बात यह है कि इस सगंध फसलों को जंगली जानवरों का भी कोई डर नहीं होगा। लिहाजा, सगंधित फसल की लगातार बढ़ रही मांग को लेकर इससे किसान आर्थिकी रूप से मजबूत हो सकते हैं। जम्मू के रियासी जिला के करीब तीस किसानों ने सीएसआईआर पालमपुर में चले जागरुक शिविर में भाग लिया। इसके तहत किसानों को सगंधित गुलाब, जंगली गेंदा, मुश्कबाला, लैवेंडर, रोजमेरी आदि की खेती उत्पादन एवं मूल्यवर्धन के बारे में जानकारी दी। संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके सूद ने बताया कि ये सगंधित पौधे संसार में विभिन्न प्रकार के सगंधीय उद्योग, खाद्य उद्योग और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में उपयोग में लाए जाते हैं। इनकी वैश्विक मांग निरंतर बढ़ रही है। सीएसआईआर की ओर से अरोमा मिशन के तहत करीब साढ़े पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध फसलों को लगवाया जा रहा है।