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नपं बैजनाथ में खर्च सरकारी धन की उठाई जांच की मांग
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बैजनाथ (कांगड़ा)। विकास कार्यों को लेकर आपसी खींचतान में उलझी बैजनाथ पपरोला नपं के 11 में से 6 पार्षदों ने नपं में हो रहे विकास कार्यों में व्यय की जा रही राशि को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्षद अमित कपूर, कांता देवी, अनिता सूद, रुचि कपूर, रमेश कुमार और कविता चौधरी ने मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, जिलाधीश और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच करने को कहा है। पार्षदों का आरोप है कि 14वें वित्त आयोग के तहत हुए कार्यों में धांधली कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया है। पूरी नपं में सफाई व्यवस्था के नाम पर हर माह तीन लाख 75 हजार रुपये निकल रहे हैं, लेकिन, 11 वार्डों में सफाई न होकर केवल मात्र बैजनाथ और पपरोला बाजारों तक ही सीमित रह रही है। हिसाब मांगने पर उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपनी मनमानी करके बिना टेंडर प्रक्रिया के विकास कार्यों को करवा रहे हैं। उन्हें प्रस्ताव का हवाला देकर गुमराह किया जा रहा है। वर्तमान में बिना प्रस्ताव के कार्य लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि 14 जुलाई को आधा दर्जन पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन, उस समय के प्रशासनिक अधिकारी और सरकार ने बिना कारण के स्टे लगवा दिया। दो वर्ष पूर्व गठित नपं में पर्याप्त स्टाफ न होने का खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो अधिकारी तैनात हैं। उनकी कार्य प्रणाली भी संतोषजनक नहीं है।
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बैजनाथ (कांगड़ा)। विकास कार्यों को लेकर आपसी खींचतान में उलझी बैजनाथ पपरोला नपं के 11 में से 6 पार्षदों ने नपं में हो रहे विकास कार्यों में व्यय की जा रही राशि को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्षद अमित कपूर, कांता देवी, अनिता सूद, रुचि कपूर, रमेश कुमार और कविता चौधरी ने मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, जिलाधीश और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच करने को कहा है। पार्षदों का आरोप है कि 14वें वित्त आयोग के तहत हुए कार्यों में धांधली कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया है। पूरी नपं में सफाई व्यवस्था के नाम पर हर माह तीन लाख 75 हजार रुपये निकल रहे हैं, लेकिन, 11 वार्डों में सफाई न होकर केवल मात्र बैजनाथ और पपरोला बाजारों तक ही सीमित रह रही है। हिसाब मांगने पर उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपनी मनमानी करके बिना टेंडर प्रक्रिया के विकास कार्यों को करवा रहे हैं। उन्हें प्रस्ताव का हवाला देकर गुमराह किया जा रहा है। वर्तमान में बिना प्रस्ताव के कार्य लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि 14 जुलाई को आधा दर्जन पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन, उस समय के प्रशासनिक अधिकारी और सरकार ने बिना कारण के स्टे लगवा दिया। दो वर्ष पूर्व गठित नपं में पर्याप्त स्टाफ न होने का खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो अधिकारी तैनात हैं। उनकी कार्य प्रणाली भी संतोषजनक नहीं है।