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पहाड़ी इलाकों में फेल हुई फायर फाइटर बाइक
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पहाड़ी इलाकों में फेल हुई फायर फाइटर बाइक
सब हेड
बाइक के भारी वजन ने बढ़ाई अग्रिशमन कर्मचारियों की दिक्कतें
क्रासर
अग्रिशमन केंद्र धर्मशाला में पिछले डेढ़ साल से बनी शोपीस
विपिन चौधरी
धर्मशाला। सूबे की संकरी गलियों, मोहल्लों और तंग बाजारों में आग लगने की स्थिति में उस पर तुरंत काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग के बेड़े में शामिल फायर फाइटर बाइक पहाड़ी इलाकों में फेल हो गई है। पहाड़ी इलाकों में इस फायर फाइटर बाइक से आग पर काबू तो पाया जा सकता है, लेकिन इस बाइक को चलाना और संभालना कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब है।
करीब डेढ़ साल से अग्निशमन केंद्र धर्मशाला में शामिल हुई बाइक को आज दिन तक प्रयोग में नहीं लाया गया है। हालांकि इस दौरान ऐसी कोई भी परिस्थिति सामने नहीं आई, जहां पर इस बाइक का इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन सूत्रों की मानें तो यह बाइक पहाड़ी इलाकों में पूरी तरह से फेल है। इस बाइक में अत्याधुनिक तकनीकों के साथ-साथ आग पर काबू पाने के हर यंत्र मौजूद हैं। ऐसे में इस बाइक का वजन 2 से तीन क्विंटल तक पहुंच जाता है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में इस बाइक को चलाना मुश्किल है। हैरानी की बात है कि इस बाइक को चलाने के लिए न तो कोई प्रशिक्षित चालक है और न ही इसकी कोई व्यवस्था है। इस बाइक को अग्निशमन विभाग सहित होमगार्ड के जवान चला लेते हैं, लेकिन उन्हें भी भारी वजन के कारण इसे संभालने में दिक्कतें आती हैं।
बाइक में यह है खास
आम मोटरसाइकिलों से अलग दिखने वाली इस फायर फाइटर बाइक के दोनों ओर वाटर टैंक लगाए गए हैं। वाटर टैंक की क्षमता करीब 10-10 लीटर की है। इसमें 10 से 12 फुट लंबी पाइप लगी होती है। इसके अलावा इसमें सायरन के अलावा अन्य ऐसे उपकरण लगे हैं, जिसकी वजह से इसका वजन आम बाइक के मुकाबले कई गुणा अधिक बढ़ गया है।
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कोट्स
फायर फाइटर बाइक का वजन अधिक होता है। इसलिए इसे संभालना थोड़ा मुश्किल है। फिर भी अग्निशमन विभाग के कर्मी इसे ठीक ढंग से चला लेते हैं। - एसके चौधरी, फायर अफसर कांगड़ा।
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बाइक के भारी वजन ने बढ़ाई अग्रिशमन कर्मचारियों की दिक्कतें
क्रासर
अग्रिशमन केंद्र धर्मशाला में पिछले डेढ़ साल से बनी शोपीस
विपिन चौधरी
धर्मशाला। सूबे की संकरी गलियों, मोहल्लों और तंग बाजारों में आग लगने की स्थिति में उस पर तुरंत काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग के बेड़े में शामिल फायर फाइटर बाइक पहाड़ी इलाकों में फेल हो गई है। पहाड़ी इलाकों में इस फायर फाइटर बाइक से आग पर काबू तो पाया जा सकता है, लेकिन इस बाइक को चलाना और संभालना कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब है।
करीब डेढ़ साल से अग्निशमन केंद्र धर्मशाला में शामिल हुई बाइक को आज दिन तक प्रयोग में नहीं लाया गया है। हालांकि इस दौरान ऐसी कोई भी परिस्थिति सामने नहीं आई, जहां पर इस बाइक का इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन सूत्रों की मानें तो यह बाइक पहाड़ी इलाकों में पूरी तरह से फेल है। इस बाइक में अत्याधुनिक तकनीकों के साथ-साथ आग पर काबू पाने के हर यंत्र मौजूद हैं। ऐसे में इस बाइक का वजन 2 से तीन क्विंटल तक पहुंच जाता है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में इस बाइक को चलाना मुश्किल है। हैरानी की बात है कि इस बाइक को चलाने के लिए न तो कोई प्रशिक्षित चालक है और न ही इसकी कोई व्यवस्था है। इस बाइक को अग्निशमन विभाग सहित होमगार्ड के जवान चला लेते हैं, लेकिन उन्हें भी भारी वजन के कारण इसे संभालने में दिक्कतें आती हैं।
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बाइक में यह है खास
आम मोटरसाइकिलों से अलग दिखने वाली इस फायर फाइटर बाइक के दोनों ओर वाटर टैंक लगाए गए हैं। वाटर टैंक की क्षमता करीब 10-10 लीटर की है। इसमें 10 से 12 फुट लंबी पाइप लगी होती है। इसके अलावा इसमें सायरन के अलावा अन्य ऐसे उपकरण लगे हैं, जिसकी वजह से इसका वजन आम बाइक के मुकाबले कई गुणा अधिक बढ़ गया है।
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फायर फाइटर बाइक का वजन अधिक होता है। इसलिए इसे संभालना थोड़ा मुश्किल है। फिर भी अग्निशमन विभाग के कर्मी इसे ठीक ढंग से चला लेते हैं। - एसके चौधरी, फायर अफसर कांगड़ा।