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पौंग बांध विस्थापितों के हल को मुख्य सचिवों की होगी बैठक : सीएम
Updated Thu, 13 Dec 2018 12:00 AM IST
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पौंग बांध विस्थापितों की समस्या का जल्द हल निकालेंगे : सीएम
प्रभावित परिवारों का कंप्यूटराइज्ड ब्योरा राजस्थान सरकार को भेजा जाएगा
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार विस्थापितों के लिए प्रदेश में जमीन चिह्नित का चल रहा काम
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं को सुलझाने के लिए वह तत्पर हैं। इस समस्या के समाधान को हिमाचल और राजस्थान के मुख्य सचिवों की बैठक जल्द करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति की 24वीं बैठक में राजस्थान सरकार की ओर से आग्रह किया गया था 16352 प्रभावित परिवारों का कंप्यूटराइज्ड ब्योरा उपलब्ध करवाया जाए, इसका कार्य प्रगति पर है। 31 जनवरी 2019 को 339 गांवों के 16352 प्रभावित परिवारों का ब्योरा पूर्ण करके राजस्थान सरकार को भेज दिया जाएगा। अभी तक करीब 30 गांवों का कार्य पूर्ण हो चुका है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिमाचल में पौंग बांध विस्थापितों को जमीन देने के लिए भूमि के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका खर्चा राजस्थान सरकार वहन करे, इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है। उपायुक्त राहत एवं पुनर्वास राजा का तालाब और तहसीलदार फतेहपुर को पौंग बांध विस्थापितों का पूर्ण ब्योरा देने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री विधायक होशियार सिंह की ओर से सदन में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से दिए गए फैसले के अनुरूप पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए उठाए गए मामले को लेकर उत्तर दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौंग बांध विस्थापितों की भावनाओं की सरकार कद्र करती है। यह सच है कि हमारा पानी, हमारी जमीन जाने के बाद बर्बादी भी हमारी हुई। पूर्व में इस समस्या के समाधान के लिए अफसरों ने कम प्रयास किए जिस वजह से दिक्कत बढ़ी। राजस्थान में सरकार बदली है। नई सरकार के साथ भी हम दस विषयों पर अपनी बात करेंगे। इससे पहले विधायक होशियार सिंह ने कहा कि 1972 से पौंग विस्थापित दर्द झेल रहे हैं। हमें पुनर्वास से पहले ही उजाड़ दिया गया। कायदे से पहले हमारा पुनर्वास होता फिर पौंग बांध प्रोजेक्ट का निर्माण होता। पौंग बांध विस्थापितों पर जापान के हिरोशिमा की तरह बर्बादी का बम गिराया गया। हमारा इलाका हिमाचल का हिरोशिमा बन गया है जहां सिर्फ बर्बादी है। हिमाचल सरकार को राजस्थान से समस्या के हल के लिए कड़ा व्यवहार करना चाहिए।
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प्रभावित परिवारों का कंप्यूटराइज्ड ब्योरा राजस्थान सरकार को भेजा जाएगा
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार विस्थापितों के लिए प्रदेश में जमीन चिह्नित का चल रहा काम
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं को सुलझाने के लिए वह तत्पर हैं। इस समस्या के समाधान को हिमाचल और राजस्थान के मुख्य सचिवों की बैठक जल्द करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति की 24वीं बैठक में राजस्थान सरकार की ओर से आग्रह किया गया था 16352 प्रभावित परिवारों का कंप्यूटराइज्ड ब्योरा उपलब्ध करवाया जाए, इसका कार्य प्रगति पर है। 31 जनवरी 2019 को 339 गांवों के 16352 प्रभावित परिवारों का ब्योरा पूर्ण करके राजस्थान सरकार को भेज दिया जाएगा। अभी तक करीब 30 गांवों का कार्य पूर्ण हो चुका है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिमाचल में पौंग बांध विस्थापितों को जमीन देने के लिए भूमि के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका खर्चा राजस्थान सरकार वहन करे, इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है। उपायुक्त राहत एवं पुनर्वास राजा का तालाब और तहसीलदार फतेहपुर को पौंग बांध विस्थापितों का पूर्ण ब्योरा देने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री विधायक होशियार सिंह की ओर से सदन में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से दिए गए फैसले के अनुरूप पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए उठाए गए मामले को लेकर उत्तर दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौंग बांध विस्थापितों की भावनाओं की सरकार कद्र करती है। यह सच है कि हमारा पानी, हमारी जमीन जाने के बाद बर्बादी भी हमारी हुई। पूर्व में इस समस्या के समाधान के लिए अफसरों ने कम प्रयास किए जिस वजह से दिक्कत बढ़ी। राजस्थान में सरकार बदली है। नई सरकार के साथ भी हम दस विषयों पर अपनी बात करेंगे। इससे पहले विधायक होशियार सिंह ने कहा कि 1972 से पौंग विस्थापित दर्द झेल रहे हैं। हमें पुनर्वास से पहले ही उजाड़ दिया गया। कायदे से पहले हमारा पुनर्वास होता फिर पौंग बांध प्रोजेक्ट का निर्माण होता। पौंग बांध विस्थापितों पर जापान के हिरोशिमा की तरह बर्बादी का बम गिराया गया। हमारा इलाका हिमाचल का हिरोशिमा बन गया है जहां सिर्फ बर्बादी है। हिमाचल सरकार को राजस्थान से समस्या के हल के लिए कड़ा व्यवहार करना चाहिए।
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