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दोष सिद्घ न होने पर बरी हुआ दुष्कर्म का आरोपी
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:49 AM IST
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धर्मशाला। अदालत में आरोप साबित न होने पर पोक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार 63 वर्षीय आरोपी को बरी कर दिया गया। यह फैसला न्यायाधीश पुष्पेंद्र वैद्य की विशेष अदालत ने सुनाया है।
अभियुक्त पक्ष की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुरेश कुमार ठाकुर ने बताया कि पुलिस थाना नूरपुर में 19 जुलाई, 2013 को क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसके साथ एक गोरखा समुदाय के व्यक्ति ने दुष्कर्म करने का प्रयास किया था। नाबालिग ने शिकायत में कहा था कि वह आरोपी के घर में पानी भरने गई थी। इस दौरान उसके साथ 63 वर्षीय बुजुर्ग ने दुष्कर्म करने की कोशिश की थी। आरोपी नूरपुर क्षेत्र के एक मंदिर में रहता था। बयान में नाबालिग लड़की ने दर्ज करवाया था कि आरोपी ने उसे चेतावनी दी थी कि अगर वह इस बारे में किसी को बताती है तो वह उसके माता-पिता को कुएं में धकेल कर मौत की नींद सुला देगा। अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील ने 15 गवाह पेश किए। लेकिन यह गवाह और पुलिस के जुटाए गए साक्ष्यों से आरोपी पर दोष सिद्ध नहीं हो सके। इसके चलते न्यायाधीश पुष्पेंद्र वैद्य की विशेष अदालत ने आरोपी को दोष मुक्त करार दिया।
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अभियुक्त पक्ष की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुरेश कुमार ठाकुर ने बताया कि पुलिस थाना नूरपुर में 19 जुलाई, 2013 को क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसके साथ एक गोरखा समुदाय के व्यक्ति ने दुष्कर्म करने का प्रयास किया था। नाबालिग ने शिकायत में कहा था कि वह आरोपी के घर में पानी भरने गई थी। इस दौरान उसके साथ 63 वर्षीय बुजुर्ग ने दुष्कर्म करने की कोशिश की थी। आरोपी नूरपुर क्षेत्र के एक मंदिर में रहता था। बयान में नाबालिग लड़की ने दर्ज करवाया था कि आरोपी ने उसे चेतावनी दी थी कि अगर वह इस बारे में किसी को बताती है तो वह उसके माता-पिता को कुएं में धकेल कर मौत की नींद सुला देगा। अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील ने 15 गवाह पेश किए। लेकिन यह गवाह और पुलिस के जुटाए गए साक्ष्यों से आरोपी पर दोष सिद्ध नहीं हो सके। इसके चलते न्यायाधीश पुष्पेंद्र वैद्य की विशेष अदालत ने आरोपी को दोष मुक्त करार दिया।
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