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नियमित होने की आस में दैनिक भोगी
Updated Mon, 25 Jun 2018 11:28 PM IST
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नियमित होने की आस में दैनिक वेतन भोगी
आयुर्वेद विभाग में कई साल से दे रहे सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। आयुर्वेद दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से कई साल से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित करने की गुहार लगाई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष तरसेम कुमार और प्रदेश सचिव मोहन सिंह ने आयुर्वेद विभाग में करीब डेढ़ सौ से ज्यादा ऐसे कर्मचारी हैं, जो पांच साल और एक वर्ष के 240 दिन पूर्ण करने के बाद भी नियमित नहीं हुए हैं। जबकि, अन्य विभागों में कई कर्मचारी इस नीति के तहत अरसा पहले नियमित हो चुके हैं। पिछले कई सालों से आयुर्वेद विभाग में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी अपनी अनदेखी के चलते परिवार का सही से पालन-पोण करने में भी असमर्थ हो चुके हैं। वर्ष 2012 में भाजपा सरकार ने दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले कई कर्मचारियों को नियमित किया था। तब आयुर्वेद विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए गलत आंकड़ा बताकर नियमित कर दिया गया था, जिससे कई जूनियर कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ मिला, जबकि कई सीनियर कर्मचारी नियमितीकरण के लाभ से वंचित रह गए। इसके बाद 2013 में कई जूनियर कर्मचारियों को प्रमोट से डिमोट कर दिया गया, जो प्रदेश सरकार के नियमितीकरण को लेकर बनाए गए सभी नियमों और शर्तों को पूरा करते थे। इसके बावजूद प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के चलते कई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित होने की आस में सेवानिवृत्त भी हो गए। जहां तक कि इन कर्मचारियों को न तो पेंशन की सुविधा है और न ही ग्रेच्युटी की सुविधा है। ऐसे हालात में 19 साल से आयुर्वेद विभाग में अपनी सेवाएं देने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नियमितीकरण की आस में प्रदेश सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
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आयुर्वेद विभाग में कई साल से दे रहे सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। आयुर्वेद दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से कई साल से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित करने की गुहार लगाई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष तरसेम कुमार और प्रदेश सचिव मोहन सिंह ने आयुर्वेद विभाग में करीब डेढ़ सौ से ज्यादा ऐसे कर्मचारी हैं, जो पांच साल और एक वर्ष के 240 दिन पूर्ण करने के बाद भी नियमित नहीं हुए हैं। जबकि, अन्य विभागों में कई कर्मचारी इस नीति के तहत अरसा पहले नियमित हो चुके हैं। पिछले कई सालों से आयुर्वेद विभाग में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी अपनी अनदेखी के चलते परिवार का सही से पालन-पोण करने में भी असमर्थ हो चुके हैं। वर्ष 2012 में भाजपा सरकार ने दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले कई कर्मचारियों को नियमित किया था। तब आयुर्वेद विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए गलत आंकड़ा बताकर नियमित कर दिया गया था, जिससे कई जूनियर कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ मिला, जबकि कई सीनियर कर्मचारी नियमितीकरण के लाभ से वंचित रह गए। इसके बाद 2013 में कई जूनियर कर्मचारियों को प्रमोट से डिमोट कर दिया गया, जो प्रदेश सरकार के नियमितीकरण को लेकर बनाए गए सभी नियमों और शर्तों को पूरा करते थे। इसके बावजूद प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के चलते कई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित होने की आस में सेवानिवृत्त भी हो गए। जहां तक कि इन कर्मचारियों को न तो पेंशन की सुविधा है और न ही ग्रेच्युटी की सुविधा है। ऐसे हालात में 19 साल से आयुर्वेद विभाग में अपनी सेवाएं देने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नियमितीकरण की आस में प्रदेश सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।