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भारत में जातिवाद बंद होना चाहिए: दलाईलामा
Updated Tue, 17 Apr 2018 12:29 AM IST
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भारत में जातिवाद बंद होना चाहिए : दलाईलामा
मैकलोडगंज में पर्यटकों से बातचीत में बोले धर्मगुरु
मैकलोडगंज।
धर्मगुुुरु दलाईलामा ने कहा कि भारत में व्याप्त जातिवाद सही नहीं है। भारत में व्याप्त जातिवाद की वजह से राष्ट्र की एकता को धक्का लगता है। मुख्य बौद्ध मंदिर मैकलोडगंज में पर्यटकों के साथ बातचीत के दौरान धर्मगुरु ने जातिवाद पर कटाक्ष किया। हालांकि, दलाईलामा ने भारत की हजारों साल पुरानी धर्मनिरपेक्ष नीति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत में भेदभावपूर्ण जातिवाद सिस्टम बंद होना चाहिए। 21वीं सदी में 20वीं शताब्दी की गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए। अगर हम हमेशा खुद के बारे में ही सोचते रहेंगे तो दुनिया अकेली हो जाएगी। दलाईलामा ने पर्यटकों के प्रश्नों का दिल खोलकर जवाब दिया। कार्यक्रम में यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित करीब 68 देशों से 1000 पर्यटक पहुंचे थे। दलाईलामा ने पर्यटकों को आंतरिक शांति हासिल करने के टिप्स भी दिए
दलाईलामा ने भारत में धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं की प्रशंसा की। दलाईलामा ने कहा कि भारत में बहु धार्मिक परंपराएं विद्यमान हैं। ऐसा सिर्फ भारत में ही संभव हो सकता है। यह अद्भुत बात है। उन्होंने कहा कि तिब्बत ने भारत के प्राचीन ज्ञान को संरक्षित किया है। नालंदा का समृद्ध प्राचीन ज्ञान तिब्बती भाषा ने संजोया इसलिए इस भाषा के संरक्षण की जरूरत है।
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भारत में जातिवाद बंद होना चाहिए : दलाईलामा
मैकलोडगंज में पर्यटकों से बातचीत में बोले धर्मगुरु
मैकलोडगंज।
धर्मगुुुरु दलाईलामा ने कहा कि भारत में व्याप्त जातिवाद सही नहीं है। भारत में व्याप्त जातिवाद की वजह से राष्ट्र की एकता को धक्का लगता है। मुख्य बौद्ध मंदिर मैकलोडगंज में पर्यटकों के साथ बातचीत के दौरान धर्मगुरु ने जातिवाद पर कटाक्ष किया। हालांकि, दलाईलामा ने भारत की हजारों साल पुरानी धर्मनिरपेक्ष नीति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत में भेदभावपूर्ण जातिवाद सिस्टम बंद होना चाहिए। 21वीं सदी में 20वीं शताब्दी की गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए। अगर हम हमेशा खुद के बारे में ही सोचते रहेंगे तो दुनिया अकेली हो जाएगी। दलाईलामा ने पर्यटकों के प्रश्नों का दिल खोलकर जवाब दिया। कार्यक्रम में यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित करीब 68 देशों से 1000 पर्यटक पहुंचे थे। दलाईलामा ने पर्यटकों को आंतरिक शांति हासिल करने के टिप्स भी दिए
दलाईलामा ने भारत में धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं की प्रशंसा की। दलाईलामा ने कहा कि भारत में बहु धार्मिक परंपराएं विद्यमान हैं। ऐसा सिर्फ भारत में ही संभव हो सकता है। यह अद्भुत बात है। उन्होंने कहा कि तिब्बत ने भारत के प्राचीन ज्ञान को संरक्षित किया है। नालंदा का समृद्ध प्राचीन ज्ञान तिब्बती भाषा ने संजोया इसलिए इस भाषा के संरक्षण की जरूरत है।
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