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सोशल मीडिया से फिर उभरी राष्ट्रवाद की भावना : मनीष
Updated Sun, 17 Dec 2017 12:14 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। वरिष्ठ पत्रकार मनीश ठाकुर ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति तक मीडिया का मुख्य एजेंडा राष्ट्रवाद ही था, लेकिन आजादी के बाद कुछ कारणों से राष्ट्रवाद को नकारात्मक नजरिए से पेश किया गया और मीडिया से भी राष्ट्रवाद गायब हो गया। अरसे बाद सोशल मीडिया के उभार के कारण भारतीयों में दबी राष्ट्रवाद की भावना फिर से उभर आई है।
शनिवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय में ललितादित्य व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। सेमिनार में मनीश ठाकुर ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण हर व्यक्ति पत्रकार बन गया है और प्रत्येक व्यक्ति का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण बन गया है। भले ही सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हों, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इसके कारण अब झूठ का कारोबार करना मुश्किल हो गया है। कहीं से झूठी खबर चलती है तो सोशल मीडिया में जल्द ही उसका खंडन हो जाता है। सोशल मीडिया के कारण अब बड़े चैनलों पर भी खबरों के साथ फरेब करना कठिन हा गया है। समान विचार के लोग एक दूसरे से वर्षों बाद भी जुड़ रहे हैं और इसके कारण ही राष्ट्रवाद की लहर फिर से पैदा हुई है। तमाम खूबियों के बावजूद सोशल मीडिया भी दूध से धुली हुई नहीं है। इस पर अनियंत्रित और अप्रमाणिक खबरें भी धड़ल्ले से चलती हैं। सोशल मीडिया इस सवाल से कैसे जूझती है। इसी बात पर इसका भविष्य निर्भर करता है। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जय प्रकाश, मूलचंद्रा सिंह, ज्योत्सना, रेशमा, जयेश और पुष्पांकर सहित शोर्धाथी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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धर्मशाला। वरिष्ठ पत्रकार मनीश ठाकुर ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति तक मीडिया का मुख्य एजेंडा राष्ट्रवाद ही था, लेकिन आजादी के बाद कुछ कारणों से राष्ट्रवाद को नकारात्मक नजरिए से पेश किया गया और मीडिया से भी राष्ट्रवाद गायब हो गया। अरसे बाद सोशल मीडिया के उभार के कारण भारतीयों में दबी राष्ट्रवाद की भावना फिर से उभर आई है।
शनिवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय में ललितादित्य व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। सेमिनार में मनीश ठाकुर ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण हर व्यक्ति पत्रकार बन गया है और प्रत्येक व्यक्ति का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण बन गया है। भले ही सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हों, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इसके कारण अब झूठ का कारोबार करना मुश्किल हो गया है। कहीं से झूठी खबर चलती है तो सोशल मीडिया में जल्द ही उसका खंडन हो जाता है। सोशल मीडिया के कारण अब बड़े चैनलों पर भी खबरों के साथ फरेब करना कठिन हा गया है। समान विचार के लोग एक दूसरे से वर्षों बाद भी जुड़ रहे हैं और इसके कारण ही राष्ट्रवाद की लहर फिर से पैदा हुई है। तमाम खूबियों के बावजूद सोशल मीडिया भी दूध से धुली हुई नहीं है। इस पर अनियंत्रित और अप्रमाणिक खबरें भी धड़ल्ले से चलती हैं। सोशल मीडिया इस सवाल से कैसे जूझती है। इसी बात पर इसका भविष्य निर्भर करता है। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जय प्रकाश, मूलचंद्रा सिंह, ज्योत्सना, रेशमा, जयेश और पुष्पांकर सहित शोर्धाथी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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