{"_id":"5aa41ccc4f1c1b8f778b4b49","slug":"101520704716-kangra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो सालों में बैजनाथ-पपरोला नपं को नहीं मिली डंपिंग साइट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो सालों में बैजनाथ-पपरोला नपं को नहीं मिली डंपिंग साइट
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकुमाद सूद
बैजनाथ (कांगड़ा)। प्रदेश की सबसे बड़ी नगर पंचायत में शामिल बैजनाथ-पपरोला के कूड़े-कर्कट को ठिकाने लगाने लिए दो वर्ष में डंपिंग साइट तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। लोगों को नई सरकार से इसकी उम्मीद जगी थी, लेकिन नई सरकार ने अब तक इस पर धरातल में कोई ठोस कदम नही उठाए हैं। नपं के तहत आने वाले कुल 11 वार्ड में 15 हजार के करीब मतदाता हैं। इतनी जनसंख्या के कूड़े-कर्कट को रोजाना एनएच के समीप विनबा खड्ड के किनारे पर जलाया जा रहा है।
बैजनाथ के कूड़े-कर्कट को पवित्र धार्मिक स्थल खीर गंगा घाट के समीप और पपरोला के कूड़े को रेलवे पुल के समीप ठिकाने लगाया जा रहा है। वहीं, वार्डों के कूड़े को या तो रास्तों के किनारों पर फेंका जा रहा है या फिर एलवी, रैनकी और अन्य कूहलों में बहाया जा रहा है। अब तक दो तीन स्थानों का चयन डंपिंग साइट के लिए किया जा चुका है, लेकिन औपचारिकताओं को पूरा करने में किसी भी प्रतिनिधि ने रुचि नहीं दिखाई है। डंपिंग साइट का कार्य चयन से आगे नही बढ़ सका है। विनबा खड्ड के किनारे जलाए जा रहे कूड़े से एनएच से गुजरने वाले राहगीरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं, कूहलों में फेंका जा रहा कूड़ा पानी को दूषित कर रहा है। यही नहीं बाहरी प्रदेशों के पर्यटक भी इसका शिकार हो रहे हैं। इस संबंध में विधायक मुलख राज प्रेमी का कहना है कि जल्द ही इस समस्या से लोगों को निजात मिलेगी। नपं के सचिव एवं एसडीएम विकास शुक्ला ने बताया कि डंपिंग साइट के लिए दो तीन स्थानों का चयन किया गया है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहले कूड़े के निस्तारण का प्रबंध कर डंपिंग साइट को शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन
बैजनाथ (कांगड़ा)। प्रदेश की सबसे बड़ी नगर पंचायत में शामिल बैजनाथ-पपरोला के कूड़े-कर्कट को ठिकाने लगाने लिए दो वर्ष में डंपिंग साइट तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। लोगों को नई सरकार से इसकी उम्मीद जगी थी, लेकिन नई सरकार ने अब तक इस पर धरातल में कोई ठोस कदम नही उठाए हैं। नपं के तहत आने वाले कुल 11 वार्ड में 15 हजार के करीब मतदाता हैं। इतनी जनसंख्या के कूड़े-कर्कट को रोजाना एनएच के समीप विनबा खड्ड के किनारे पर जलाया जा रहा है।
बैजनाथ के कूड़े-कर्कट को पवित्र धार्मिक स्थल खीर गंगा घाट के समीप और पपरोला के कूड़े को रेलवे पुल के समीप ठिकाने लगाया जा रहा है। वहीं, वार्डों के कूड़े को या तो रास्तों के किनारों पर फेंका जा रहा है या फिर एलवी, रैनकी और अन्य कूहलों में बहाया जा रहा है। अब तक दो तीन स्थानों का चयन डंपिंग साइट के लिए किया जा चुका है, लेकिन औपचारिकताओं को पूरा करने में किसी भी प्रतिनिधि ने रुचि नहीं दिखाई है। डंपिंग साइट का कार्य चयन से आगे नही बढ़ सका है। विनबा खड्ड के किनारे जलाए जा रहे कूड़े से एनएच से गुजरने वाले राहगीरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं, कूहलों में फेंका जा रहा कूड़ा पानी को दूषित कर रहा है। यही नहीं बाहरी प्रदेशों के पर्यटक भी इसका शिकार हो रहे हैं। इस संबंध में विधायक मुलख राज प्रेमी का कहना है कि जल्द ही इस समस्या से लोगों को निजात मिलेगी। नपं के सचिव एवं एसडीएम विकास शुक्ला ने बताया कि डंपिंग साइट के लिए दो तीन स्थानों का चयन किया गया है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहले कूड़े के निस्तारण का प्रबंध कर डंपिंग साइट को शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन