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फोन टैपिंग मामले की जांच आसान नहीं

Mon, 13 May 2013 05:07 PM IST
शिमला/ब्यूरो
शिमला/ब्यूरो Updated Mon, 13 May 2013 05:07 PM IST
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investigation of phone tapping case is not easy

हिमाचल सीआईडी फोन टैपिंग मामले की जांच के लिए विजिलेंस को एक साल का ब्योरा ही दे पाई है।

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अभी तक उपलब्ध रिकॉर्ड से विजिलेंस को कोई खास लिंक नहीं मिल पा रहा है जिससे वह दावे के साथ अवैध फोन टैपिंग की रिपोर्ट तैयार कर सके।

वहीं, सरकार के पास मौजूद रिकॉर्ड के लिए हाल ही में विजिलेंस के शीर्ष पदस्थ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर रिकॉर्ड के लिए आग्रह किया था। इसे विजिलेंस तक पहुंचने में थोड़ा और वक्त लग सकता है।

इधर, विजिलेंस ने सीआईडी से भी कुछ बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा था जिसे उपलब्ध करवा दिया गया है। रिकॉर्ड की डिटेल बेशक विजिलेंस के पास पहुंच गई हो, लेकिन सीआईडी से केवल एक साल का ही ब्योरा ही मिल पाया है।
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सीआईडी ने इससे पहले का रिकॉर्ड किसी भी रूप में न होने की बात कही है। अब विजिलेंस को फोन टैपिंग जांच आगे बढ़ाने के लिए इसी रिकॉर्ड से ही माथापच्ची करनी पड़ रही है।
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सूत्रों की मानें तो सीआईडी के पास साल 2012 से पहले का रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं है जिससे टैपिंग से संबधित मामला प्रूव करना विजिलेंस के लिए अभी भी चुनौती है।


सीआईडी में सेवाएं दे चुके एक पुलिस अधिकारी की मानें तो ज्यादातर मामलों में ‘नारकोटिक्स’ को ढाल बनाकर फोन टैप करने की इजाजत मांगी गई है जो अपने आप में जांच का विषय है।

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