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HP High Court: परिवहन मल्टीपर्पज असिस्टेंट भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, जानें हाईकोर्ट ने क्या कहा

Tue, 05 Aug 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 05 Aug 2025 05:00 AM IST
सार

परिवहन मल्टीपर्पज असिस्टेंट (टीएमपीए) के 1300 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत में स्पष्ट किया कि एक बार आवेदन की गई श्रेणी को बाद में बदलने की अनुमति अस्वीकार्य है। 

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HP High Court Petition challenging Transport Multipurpose Assistant Recruitment dismissed
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2017-18 में हिमाचल पथ परिवहन निगम की ओर से परिवहन मल्टीपर्पज असिस्टेंट (टीएमपीए) के 1300 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की एकल पीठ ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में आवेदन किया था, न की सामान्य बीपीएल श्रेणी के रूप में।

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याचिकाकर्ता की ओर से दस्तावेज सत्यापन के समय बीपीएल प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर उसे 2 अंक दिए गए थे, लेकिन इससे उसकी श्रेणी नहीं बदल सकती थी। अदालत में स्पष्ट किया कि एक बार आवेदन की गई श्रेणी को बाद में बदलने की अनुमति अस्वीकार्य है। खासकर जब याचिकाकर्ता ने अपनी श्रेणी में बदलाव के लिए कोई गलती या अनजाने में हुई चूक का दावा नहीं किया हो।इसके अतिरिक्त एचआरटीसी की ओर से अदालत के आदेश पर की गई मेरिट की समीक्षा से पता चलता है कि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के लिए कट ऑफ अंक 78.43 पाए गए, जो याचिकाकर्ता के 77.41 अंकों से अधिक थे। याचिकाकर्ता अपनी योग्यता के आधार पर भी सामान्य श्रेणी में चयन के लिए पात्र नहीं था। अदालत ने कहा-सेवा मामलों में जनहित याचिका स्वीकार्य नहीं है। इन सभी कारणों के चलते अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया है।
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याचिकाकर्ता मुनीश शर्मा ने 1300 विज्ञापित पदों के मुकाबले 1078 अंतिम चयनित उम्मीदवारों की सूची और दिनांक 14 जून 2018 के नियुक्ति पत्र को रद्द करने की मांग की थी। याचिका में आरोप था कि सामान्य बीपीएल श्रेणी के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में शामिल करके चयन मापदंडों का उल्लंघन किया गया था, जिसकी वजह से उन्हें नुकसान हुआ। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसके कुल अंक 77. 41 थे। लेकिन उसका नाम अंतिम चयनित उम्मीदवारों की सूची में नहीं था।

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