Royal Apples: रॉयल किस्म के सेब की बंपर फसल की उम्मीद, अच्छी बर्फबारी से उद्यान विभाग के विशेषज्ञों ने जताई आस
Apple King Royal: उद्यान विभाग के विशेषज्ञ अच्छी बर्फबारी के बाद रॉयल किस्म के सेब की बंपर फसल की उम्मीद जता रहे हैं। बता दें कि हिमाचल में सेब के कुल उत्पादन का 90 फीसदी रॉयल डिलीशियस सेब है। पढ़ें पूरी खबर...
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करीब दस साल बाद आगामी सेब सीजन में एपल किंग रॉयल की बादशाहत फिर लौटेगी। उद्यान विभाग के विशेषज्ञ अच्छी बर्फबारी के बाद रॉयल किस्म के सेब की बंपर फसल की उम्मीद जता रहे हैं। अच्छी फसल के लिए रॉयल को सबसे अधिक 1200 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर की जरूरत होती है। इस साल ऊंचाई वाले सेब उत्पादक क्षेत्रों में दिसंबर में ही हिमपात हो चुका है। जनवरी में भी बर्फबारी हुई है। चिलिंग ऑवर पूरे होने पर इस सीजन में अच्छी फसल की संभावना है।
बीते कई सालों से दिसंबर और जनवरी में अच्छी बर्फबारी नहीं हो रही थी, जिससे तौलिये बनाने और बगीचों में गोबर व सुपर फास्फेट खाद डालने का काम भी देरी से हो रहा था। इस कारण पौधों को पूरा पोषण नही मिल पा रहा। पिछले सीजन में भी चिलिंग ऑवर पूरे न होने से रॉयल का उत्पादन घटा था। प्रदेश के 6500 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश के बाद इस साल जहां सीधी धूप नहीं लगती, वहां चिलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में बर्फबारी होने पर तापमान में गिरावट बनी रही तो तय समय पर चिलिंग ऑवर पूरे हो जाएंगे। हिमाचल में सेब के कुल उत्पादन का 90 फीसदी रॉयल डिलीशियस सेब है। पीजीए (प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन) के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि समय से हुई बर्फबारी के बाद रॉयल की अच्छी फसल लगने की पूरी उम्मीद है। हालांकि फ्लावरिंग के दौरान उपयुक्त मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दिसंबर, जनवरी में बर्फबारी के बाद आने वाले दिनों में भी बर्फबारी का पूर्वानुमान है। चिलिंग ऑवर पूरे होने पर रॉयल की बंपर फसल के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। इस साल समय पर तौलिये बनाने और खाद डालने का काम शुरू हो गया है, जिससे सेब का उत्पादन बढ़ने के साथ गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। - डॉ. कुशाल सिंह मेहता, विषय विशेषज्ञ उद्यान
सत्यानंद स्टोक्स 1914 में जब अमेरिका गए तो हिमाचल की मिट्टी के कुछ नमूने साथ ले गए। अमेरिका के लूजियाना की स्टॉक नर्सरी में उन्होंने हिमाचल की मिट्टी के हिसाब से उपयुक्त सेब की किस्म की जानकारी जुटाई और रॉयल डिलीशियस किस्म के सेब के पौधे भारत लेकर आए। रॉयल डिलीशियस से ही रेड डिलीशियस, रेड गोल्डन सहित कई स्पर किस्में विकसित की गई हैं।