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Himachal News: हर साल करोड़ों की फसलों और वन संपदा को चट कर रही दीमक, नियंत्रण के भी दिए हैं जरूरी सुझाव

Sun, 08 Jun 2025 11:15 AM IST
अंकेश डोगरा पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर)
पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर) Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 08 Jun 2025 11:15 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर और आसपास के अधिकतर क्षेत्रों में दीमक लगातार बढ़ रही है। दीमक रानी एक सेकेंड में एक अंडा देती है और 5 से 25 वर्ष तक अंड निक्षेपण का कार्य करती है। पढ़ें पूरी खबर...
 

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Himachal Termites are eating away crops and forest wealth worth crores every year
दीमक/घर के साथ दीमक निर्मित बामी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हमीरपुर और आसपास के अधिकतर क्षेत्रों में दीमक (सीणक) दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। फसलों और घरों में लगी लकड़ी के साथ-साथ अब पेड़-पौधों को भी दीमक नष्ट कर रही है। हर वर्ष भारत में दीमक की वजह से करोड़ों रुपये की फसलों, वन संपदा, इमारती लकड़ी एवं भंडारण को नुकसान होता है। नेरी महाविद्यालय में कीट विज्ञान विभाग के एचओडी डॉ. वीरेंद्र राणा ने नेरी महाविद्यालय में दीमक की बामी का निष्कासन किया, जो मृदा के करीब तीन फुट नीचे थी। इसकी चौड़ाई 3.8 फुट एवं बामी की चिमनियों की लंबाई लगभग तीन फुट थी। कीट विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान बामी से टरमाइट क्वीन को निष्काषित किया।

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बामी से निष्काषित रानी दीमक 9.85 सेंटीमीटर लंबी थी। इसकी आयु लगभग तीन वर्ष की थी, जो कि बहुत ही युवा है। दीमक की विभिन्न प्रजातियों में से मुख्य रूप से माइक्रोटर्मिस ओवैसी हिमाचल प्रदेश में पाई जाती है। वर्षा ऋतु में दीमक प्रजनन करने वाली अवस्था में विद्युत बल्ब या फिर किसी भी रोशनी की तरफ आकर्षित होती है। इसी समय उनकी प्रजनन प्रक्रिया शुरू होती है। रानी दीमक केवल अंडे देने का काम करती है। दीमक रानी एक सेकेंड में एक अंडा देती है और 5 से 25 वर्ष तक अंड निक्षेपण का कार्य करती है। इसी दौरान प्रजनन कर सकती है। दीमक के लाइफ साइकिल पर भी अध्ययन शुरू किया गया है।

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ऐसे कर सकते हैं दीमक से बचाव
डॉ. राणा ने बताया कि दीमक का प्रकोप ज्यादा हो, तो आसपास की बामी को सावधानीपूर्वक खोदें और रानी दीमक को नष्ट कर दें। इसके अतिरिक्त बुवाई से पहले या बाद में क्लोरपायरीफॉस 20-ईसी का दो से तीन लीटर प्रति हेक्टेयर या फिर दो-तीन मिलीलीटर प्रति एक लीटर पानी की मात्रा से मृदा में छिड़काव किया जा सकता है। हालांकि दीमक को पूर्णतः नष्ट नहीं किया जा सकता। वहीं, इसके नुकसान के अलावा प्रकृति में इसके फायदे भी हैं, इसलिए फसलों को नुकसान से बचाने एवं संरक्षण के लिए एकीकृत तकनीक का उपयोग करना चाहिए। जहां कहीं दीमक का प्रभाव ज्यादा हो तो वहां खेतों में क्लोरपायरीफॉस का छिड़काव किया जा सकता है। खेतों में पूर्णतः सड़ी हुई खाद एवं गोबर का उपयोग करें। कच्ची एवं बिना सड़ी गोबर की खाद खेतों में दीमक के प्रभाव को बढ़ा देती है।
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