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Himachal Pradesh: सर्दी वाले इलाकों में दूध उत्पादन में 30 से 40% तक की कमी, ये टिप्स अपनाने से होगा फायदा

Fri, 07 Feb 2025 03:48 PM IST
अंकेश डोगरा संजीव शर्मा, (लारजी) कुल्लू।
संजीव शर्मा, (लारजी) कुल्लू। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 07 Feb 2025 03:48 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के ज्यादा सर्दी वाले इलाकों में दुग्ध उत्पादन में कमी आई है। वहीं, चारा, फीड और खल के दाम भी बढ़ गए हैं। पशुपालकों को इससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। नुकसान से बचने के लिए क्या टिप्स अपनाएं ये जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...
 

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Himachal Pradesh Milk production decreases by 30 to 40% in winter areas adopting these tips will be beneficial
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

सूबे के ज्यादा सर्दी वाले इलाकों में दुग्ध उत्पादन में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट आई है। इन क्षेत्रों में दुधारू पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। चारा, फीड और खल के दाम भी बढ़ गए हैं। चारे के लिए इस्तेमाल होने वाली पराली के एक ट्रक के दाम 42 से बढ़कर 55 हजार रुपये हो गए हैं। 50 किलो फीड 320 और खल 600 रुपये महंगी हो गई है। पशुपालकों को इससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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कुल्लू जिले के बिहाली में ढाबा और सब्जी की दुकान चलाने वाले पितांबर के पास देसी नस्ल की साहीवाल गाय है। पीतांबर बताते हैं कि साहीवाल दिन में पहले 12 लीटर दूध देती थी। अब यह घटकर 7 से 8 लीटर रह गया है। लारजी में दुग्ध उत्पादक जरीना के पास 50 गायें और भैंसें हैं। जरीना ने बताया कि पहले दिन में 150 लीटर दूध होता था लेकिन अब 100 लीटर तक ही रह गया है। जरीना गाय-भैंसों के लिए पंजाब के रोपड़ से चारे के लिए पराली मंगवाती हैं। 42,000 रुपये में एक ट्रक मिल जाता था लेकिन अब 55,000 रुपये लग रहे हैं। 50 किलोग्राम फीड पहले 1,400 रुपये में मिलती थी, अब 1,720 रुपये लग रहे हैं। खल 1500 रुपये की थी, अब 2,100 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।

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मंडी शहर के चक्कर मिल्कफेड प्लांट में मंडी और कुल्लू जिला से दूध पहुंचता है। प्लांट के प्रभारी विश्वकांत शर्मा बताते हैं कि गर्मियों में औसतन 80,000 से 85,000 लीटर दूध रोजाना पहुंच रहा था। सर्दियों में यह 50,000 से 55,000 लीटर प्रतिदिन रह गया है। ऊना की बात करें तो जिला में करीब 1.5 लाख दुधारू पशु हैं। जुलाई से सितंबर तक दूध का प्रतिदिन उत्पादन तीन लाख लीटर है। 25,000 लीटर दूध प्रतिदिन पंजाब की बड़ी कंपनियों को पशुपालक बिक्री करते हैं। बाकी मिल्कफेड व अन्य बड़ी दुकानों में बेचा जाता है। सर्दी के मौसम में प्रतिदिन दूध का उत्पादन तीन लाख से घटकर 2.25 लाख लीटर के आसपास रह गया है। बाहरी कंपनियों को 20,000 लीटर के करीब दूध भेजा जाता है।

दुधारू पशुओं में ठंड के चलते स्ट्रेस होता है। इसी के साथ सर्दियों में चारे में कैल्शियम कम हो जाता है। इसका असर दूध उत्पादन पर पड़ता है। कुछ टिप्स अपनाकर दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है- डॉ. मुकेश महाजन, उपनिदेशक पशुपालन विभाग मंडी

ये टिप्स अपनाएं
शारीरिक तापमान न मिलने की वजह से पशुओं की दूध देने की क्षमता घट जाती है। पशुओं के शरीर पर कपड़ा डालकर उनको ठंड से बचाएं। शेड पर पराली डाल दें ताकि गर्माहट रहे। खिड़कियों पर बोरी व टाट के पर्दे आदि लगाएं ताकि शीतलहर का सीधा असर न हो। गुनगुना व ताजा पानी ही पिलाएं। धूप निकलने पर पशुओं को बाहर बांधे और सरसों के तेल से मालिश करें। संतुलित फीड दें। समय-समय पर डॉक्टरों से सलाह के बाद पेट के कीड़ों की दवाई दें। हरा चारा पहले धूप में रखें, उसके बाद ही खिलाएं।
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