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Himachal Pradesh: चीड़ की सूखी पत्तियों से शुद्ध होगा दूषित जल, लेकिन कैसे? जानने के लिए पढ़ें विस्तार से

Sat, 01 Nov 2025 03:00 AM IST
अंकेश डोगरा कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर
कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 01 Nov 2025 03:00 AM IST
सार

NIT Hamirpur: एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञों ने इन पत्तियों से कार्बन आधारित फोटो कैटलिस्ट तैयार किया है, जो केवल सूर्य की सामान्य रोशनी में जल को स्वच्छ कर देगा। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Photocatalysts made from pine leaves and sunlight will purify contaminated water NIT
जंगल में चीड़ की पत्तियां। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अब उद्योगों से निकलने वाले दूषित जल को चीड़ की सूखी पत्तियों की मदद से शुद्ध किया जा सकेगा। एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञों ने इन पत्तियों से कार्बन आधारित फोटो कैटलिस्ट तैयार किया है, जो केवल सूर्य की सामान्य रोशनी में जल को स्वच्छ कर देगा।

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यह तकनीक न केवल सस्ती है, बल्कि पर्यावरण अनुकूल भी है। एनआईटी हमीरपुर के रसायन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जय प्रकाश और शोधार्थी साहिल ठाकुर ने इस नवाचार के तहत ग्रीन कैमिस्ट्री की अवधारणा को आगे बढ़ाया है। यह शोध विश्वस्तरीय अमेरिकन कैमिकल सोसायटी के प्रतिष्ठित लैंगम्योर जर्नल में प्रकाशित हुआ है और हाल ही में एनआईटी हमीरपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसे सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र के रूप में चुना गया।

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पारंपरिक फोटो कैटलिस्ट प्रायः मेटल ऑक्साइड और सल्फाइड जैसे रासायनिक पदार्थों से बनाए जाते हैं। ये पानी को शुद्ध तो करते हैं, लेकिन स्वयं के कैमिकल प्रभाव से पर्यावरण को कुछ हद तक नुकसान पहुंचाते हैं। एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञों ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए चीड़ की पत्तियों से कार्बन बेस्ड फोटो कैटलिस्ट तैयार किया, जो न केवल प्राकृतिक है, बल्कि पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित भी है।

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रमन स्पैक्टो स्कोपी से पानी की जांच
जल कितना दूषित है इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों ने रमन स्पैक्टो स्कोपी उपकरण का प्रयोग किया है। कार्बन बेस्ड फोटो कैटलिस्ट को दूषित पानी में मिलाकर इसकी जांच स्पैक्टो स्कोपी से आसानी से हो सकेगी। इसके बाद इस पानी को स्वच्छ बनाने के लिए जरूरी मात्रा में फोटो कैटलिस्ट का प्रयोग कर इसे शुद्ध किया जा सकेगा।

पराबैंगनी किरणों पर निर्भरता कम, टेस्टिंग भी जल्दी
पारंपरिक विधि में दूषित पानी को शुद्ध करने के लिए कैमिकल से बने फोटो कैटलिस्ट का प्रयोग किया जाता है। इस विधि में सूर्य की पराबैंगनी किरणों की अधिक जरूरत होती है। फोटो कैटलिस्ट पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आने पर ही पानी को शुद्ध कर पाते हैं। यह किरणें सूर्य की रोशनी में अधिक मात्रा में सुबह और शाम के वक्त तिरछी अवस्था के दौरान उपलब्ध होती हैं। जबकि कार्बन बेस्ड फोटो कैटलिस्ट में सूर्य की सामान्य रोशनी ही पानी को शुद्ध करने के लिए काफी है। इससे यह कम समय में इस कार्य को करने में सक्षम है और कार्बन बेस्ड होने से यह सस्ता भी है।
 
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