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Himachal News: हिमाचल में 40 हजार साल पहले से है मानव जीवन, बडे़ गोल आकार के पत्थरों के औजार मिले; जानें

Thu, 21 Nov 2024 10:53 AM IST
अंकेश डोगरा भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 21 Nov 2024 10:53 AM IST
सार

हिमाचल में 40 हजार साल पहले भी मानव सभ्यता जीवित थी। राज्य संग्रहालय के अध्यक्ष हरि चौहान ने कार्यशाला के दौरान यह खुलासा किया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal News Human life existed in Himachal since 40 thousand years ago
शिमला के राज्य संग्राहलय में मजूद सिरमौर की मारकंडा घाटी से मिले पत्थरो के औजार । - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल में 40 हजार साल पहले भी मानव सभ्यता जीवित थी। पूरा पाषाण काल में मानव जाति जो औजार इस्तेमाल करती थी, इसके एतिहासिक अवशेष प्रदेश के लाहौल-स्पीति, कांगड़ा की बाण गंगा घाटी, ब्यास घाटियों, नालागढ़ के शिवालिक घाटी, बिलासपुर की सिरसा सतलुज घाटियों और सिरमौर की मारकंडा घाटी से गुजरने वाले क्षेत्र में मिले हैं।
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राज्य संग्रहालय के अध्यक्ष हरि चौहान ने कार्यशाला के दौरान यह खुलासा किया है। इन सभी घाटियों से मिले पाषाणकालीन उपकरण अभी भी राज्य संग्रहालय में मौजूद हैं। उस दौरान लोग अपनी जरूरतों के हिसाब से पत्थरों के औजार बनाते थे। इसका इस्तेमाल मांस काटने, जानवरों की खाल निकालने, जमीन में खोदने और पौधों की खाल निकालने के अलावा अपनी दूसरी जरूरतों के लिए इस्तेमाल करते थे। 
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यह औजार आज के पाषाण काल में उपयोग होने वाले कुल्हाड़ी, कुदाली, चॉपर सहित अन्य आकार के हैं। लाहौल-स्पीति के ऊपरी इलाकों में सबसे ज्यादा पाषाण काल के पत्थरों के औजार मिले हैं। साल 2017 से इन इलाकों में औजारों को ढूंढने का काम शुरू किया था, जो अभी तक भी चल रहा है। इन औजारों के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली चट्टान क्वार्ट जाइट थी। क्वार्ट जाइट एक रूपांतरित चट्टान है जो पहाड़ों के निर्माण के दौरान तलछटी बलुआ पत्थर को गर्म करने और दबाव डालने पर बनती है।
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खुलासा हुआ कि हिमाचल में तीन लाख साल से 40 हजार साल पहले तक पूरा पाषाणकाल चला। इसके बाद मध्य पाषाण काल और वर्तमान में नव पाषाणकाल चल रहा है। इससे यह साबित होता है कि तीन लाख साल से 40 हजार साल पहले भी प्रदेश में मानव सभ्यता थी। इसके अलावा संग्रहालय में मध्य पाषाण काल और नव पाषाणकाल में भी उपयोग होने वाले पत्थरों के औजार भी मिले हैं।

बडे़ गोल आकार के पत्थरों के औजार मिले
राज्य संग्रहालय में प्राग ऐतिहासिक पाषाण औजार और उनकी तकनीक विषय पर कार्यशाला में यह सभी बातें सामने आईं। इस कार्यशाला के मुख्य विशेषज्ञ के रूप में डॉ. रिजा अब्बास मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि हिमालय की घाटियों में ज्यादातर नदी के किनारे पाए जाने वाले बड़े गोल आकार के पत्थरों के औजार मिले हैं। डॉ. रिजा अब्बास जो एक नामी पुरातत्वविद हैं। यह इंडियन न्यूमिस्मेटिकस हिस्टोरिक एंड कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन नासिक में निदेशक के तौर पर कार्यरत हैं। इनका इस क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों का अनुभव है। इन्होंने प्रतिभागियों को हिमाचल राज्य संग्रहालय में मौजूद भौतिक तौर पर पाषाणकालीन उपकरणों से रूबरू करवाया। 

हड्डियों के भी बने हैं औजार
चौहान ने बताया कि पूरा पाषाण काल में पत्थरों के अलावा हड्डियों के औजार भी बनते थे। कुछ इलाकों से हड्डियों के औजार भी मिले हैं। इस काल में मौजूद मानव जाति अपने भोजन के लिए जानवरों को मारकर खाते थे। इसके बाद उनकी हड्डियों से औजार बनाते थे। 
 
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