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Himachal News: न्यायालय के निर्देशों की अवेहलना पर शिक्षा विभाग को 50 हजार जुर्माना, जानें पूरा मामला

Fri, 22 Aug 2025 03:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 22 Aug 2025 03:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने पाया कि विभाग ने बार-बार दिए गए निर्देशों की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों को नियमित करने से इन्कार किया, जबकि वह इसके लिए पूरी तरह से पात्र थे। पढ़ें पूरी खबर...
 

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Himachal News Education department fined Rs 50000 for disobeying court orders know the whole matter
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी को बार-बार न्यायालय आने के लिए मजबूर करने और अदालत के निर्देशों की अवेहलना करने पर शिक्षा विभाग को 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। अदालत में उक्त राशि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को भुगतान करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने विभाग के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे अहंकार का मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि जब याचिकाकर्ता लगभग 20 वर्षों से बिना किसी बाधा के काम कर रहा है और उसे सरकारी खजाने से वेतन मिल रहा है, तो उसकी नियुक्ति को नियमों का उल्लंघन मानकर नियमितीकरण से इन्कार करना पूरी तरह से अनुचित है।

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न्यायालय ने पाया कि विभाग ने बार-बार दिए गए निर्देशों की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों को नियमित करने से इन्कार किया, जबकि वह इसके लिए पूरी तरह से पात्र थे। अदालत ने प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता की सेवाओं को 2013 से यानी प्रारंभिक नियुक्ति के 7 साल पूरी होने के बाद नियमित करने का आदेश दिया है। यह प्रक्रिया 28 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत 4 सप्ताह के भीतर पूरी की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता 23 जून 2006 से नाहन कॉलेज में दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने चौकीदारी स्वीपर जैसे विभिन्न चतुर्थ श्रेणी के पदों पर लगातार सेवाएं दीं। याचिकाकर्ता ने सरकार की नियमितीकरण नीति के तहत अपनी सेवाओं को स्थाई करने के लिए आवेदन किया, लेकिन उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया।

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याचिकाकर्ता को अपने अधिकारों के लिए कई बार अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 16 अक्टूबर 2020 को उच्च न्यायालय के एकल पीठ ने विभाग को याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था। निर्देशों का पालन न होने पर एक बार फिर अदालत ने 4 अप्रैल 2024 और 11 दिसंबर 2024 को अपने फैसलों में यह स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता नियमितीकरण के मापदंडों को पूरा करता है, तो उसे नियमित किया जाना चाहिए। इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी विभाग ने 8 जनवरी 2025 को आवेदक को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसकी प्रारंभिक नियुक्ति नियमों के अनुसार नहीं थी। याचिकाकर्ता ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे न्यायालय ने रद्द कर दिया।

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