Himachal Pradesh: ब्लास्टिंग से थर्राई मसयाणा की पहाड़ी, कुणाह में डंपिंग से खड्ड के पानी का रुका बहाव; जानें
मसयाणा जंगल में बारिश में ब्लास्टिंग जारी है। मसयाणा चौक तक गहरी खाई के रूप में एक झील बारिश के पानी से बन गई है। यहां पर पहाड़ी के मलबे को सीधा कुणाह खड्ड में फेंका जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन के चीलबाहल से कोहली टूलेन पैच में मसयाणा जंगल में बारिश में ब्लास्टिंग जारी है। यहां 90 डिग्री की सीध में मसयाणा जंगल की पहाड़ी को काटा गया है। वन विभाग मंडल हमीरपुर का तर्क है कि ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से लगातार यहां पर ब्लास्टिंग से मसयाणा जंगल की पहाड़ी थर्रा उठी है, जिससे लोग भी दहशत में हैं। वहीं, मसयाणा चौक तक गहरी खाई के रूप में एक झील बारिश के पानी से बन गई है। यहां पर पहाड़ी के मलबे को सीधा कुणाह खड्ड में फेंका जा रहा है। इस मलबे से खड्ड का बहाव ठहर गया है। भारी मात्रा में मलबे की डंपिग सीधे खड्ड में की जा रही है।
शिमला-मटौर फोरलेन के इस टूलेन पैच को ग्रीन फील्ड का तमगा देकर यहां पर न तो डंपिंग साइट विकसित की गई और न ही अब निर्माण के मानकों की पालना हो रही है। कुणाह खड्ड पर टूलेन पुल का निर्माण भी किया जा रहा है। इस पुल के निर्माण के लिए खड्ड में भारी मलबा डाला गया है।
ऐसे में पानी की निकासी थम गई है, हालांकि पाइपें डालकर इसे कुछ हद तक बहाल किया गया, लेकिन बरसात में बारिश के पानी से काफी क्षेत्र तक पानी जमा हो गया है। ऐसे में निर्माण कार्य करने वाली कंपनी और एनएचएआई के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय निवासी मदन लाल, अश्वनी ठाकुर, अशोक कुमार, विजय शर्मा, कैप्टन कृष्ण दत्त शर्मा, पुष्पा देवी का कहना है कि पुल के निर्माण के लिए सीधे तौर पर कुणाह खड्ड के बहाव को रोक दिया गया है। यहां पर प्रशासन और विभाग को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। मसयाणा के जंगल की पहाड़ी को 90 डिग्री की सीध में काटकर यहां पर ब्लास्टिंग की जा रही है। बोर करने वाली मशीन के जरिये ब्लास्टिंग कई दिनों से जारी है। इस खड्ड पर कई पेयजल योजनाएं हैं, जिनको खतरा पैदा हो गया है। मसयाणा चौक पर कटिंग से बरसात का पानी कृत्रिम झील का रूप ले चुका है। यहां पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। दुकानों में पानी और मलबा घुस गया है।
एनएचएआई और निर्माण कार्य कर रही कंपनी के अधिकारियों को कई बार इस बारे में स्थानीय लोगों ने आगाह किया है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर निर्माण लगातार जारी है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक विक्रम मीणा से जब इस विषय पर फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।