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Himachal: राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी बोले- बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम का नाम बदल केंद्र ने दिया धोखा
Mon, 21 Apr 2025 06:03 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Mon, 21 Apr 2025 06:03 PM IST
सार
राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (बीएडीपी) का नाम वाइब्रेंट विलेज बदलकर केंद्र सरकार ने हिमाचल के साथ धोखा किया है।
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राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी (File Photo)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी विकास के लिए शुरू की गए बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (बीएडीपी) का नाम वाइब्रेंट विलेज बदलकर केंद्र सरकार ने हिमाचल के साथ धोखा किया है। बीएडीपी में हिमाचल के दो जिलों लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले के लिए 239 गांवों का चयन किया गया था, वाइब्रेंट विलेज में इनकी संख्या घटाकर 75 कर दी गई है। राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि 2022 में योजना का नाम बदलकर हिमाचल के साथ धोखा किया गया।
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कहा कि किन्नौर जिले के दो ब्लॉक कल्पा और पूह पूरे के पूरे बीएडीपी याेजना में शामिल थे। प्रदेश ने करीब 1000 करोड़ की डीपीआर इस योजना के तहत केंद्र को भेजी थी लेकिन केंद्र से मदद नहीं मिली। गैप फंडिंग के तौर पर इस योजना के तहत सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़कें, पेयजल, सिंचाई योजनाएं, स्कूल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी थीं। इतना ही नहीं, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लिए एंटी फ्रीजिंग स्कीम की घोषणा की गई थी, जिससे माइनस तापमान में भी लोगों के पेयजल उपलब्ध करवाया जा सके। किन्नौर के लिए 80 करोड़ और लाहौल-स्पीति के लिए 50 करोड़ की घोषणा हुई थी, लेकिन इस योजना में भी केंद्र ने अब तक कोई पैसा जारी नहीं किया है।
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फिर दोहराया...चीन का गांव बसाने और सुविधाएं जुटाने पर जोर
नेगी ने फिर दोहराया कि चीन भारत सीमा के साथ लगते अपने इलाकों में गांव बसाकर सड़कों सहित सभी रिहायशी सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है, दूसरी ओर केंद्र सरकार पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर लाभार्थी गांवों की संख्या घटाने में लगी है।
नेगी ने फिर दोहराया कि चीन भारत सीमा के साथ लगते अपने इलाकों में गांव बसाकर सड़कों सहित सभी रिहायशी सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है, दूसरी ओर केंद्र सरकार पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर लाभार्थी गांवों की संख्या घटाने में लगी है।